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'बात बिगड़ेगी, तो फिर अदालत तक जाएगी'

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:28-12-2012 02:48:10 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
'बात बिगड़ेगी, तो फिर अदालत तक जाएगी'

इस वर्ष नेताओं की बयानबाजी ने कई बवाल मचाए और कुछ विवाद तो अदालतों के दरवाजे तक जा पहुंचे। अदालती कार्यवाही का सामना कर रहे कुछ नेताओं को राहत मिली, तो कुछ को नए झमेलों से दो-चार होना पड़ा।

फरवरी में तत्कालीन विधि मंत्री सलमान खुर्शीद ने मुस्लिमों को आरक्षण संबंधी टिप्पणी की, तो निर्वाचन आयोग ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया। लेकिन आयोग की आपत्ति के बावजूद खुर्शीद ने फरुखाबाद में एक चुनावी रैली में कहा था कि वह मुस्लिमों के लिए आरक्षण के मुद्दे पर अपना संघर्ष जारी रखेंगे, फिर भले ही वह (निर्वाचन आयोग) उन्हें फांसी पर क्यों न लटका दे।

इस पर एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए निर्वाचन आयोग ने तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पत्र लिखकर खुर्शीद द्वारा कथित रूप से निर्वाचन आयोग के खिलाफ की जा रही बयानबाजी के मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। राष्ट्रपति ने यह पत्र प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यालय को भेजा और खुर्शीद को सिंह के समक्ष सफाई देनी पड़ी। बाद में निर्वाचन आयोग के साथ टकराव को समाप्त करने का प्रयास करते हुए खुर्शीद ने घटना पर अफसोस जाहिर किया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने मानहानि का मुकदमा ठोंका। दिग्विजय ने गडकरी पर उनकी पार्टी के सांसद अजय संचेती के साथ कारोबारी संबंध रखने और संचेती को कोयला ब्लॉक के आवंटन के एवज में उनसे 500 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया था। बहरहाल, मामले में दिग्विजय सिंह को अदालत से जमानत मिल चुकी है।

गडकरी की अपनी कंपनी को लेकर भी उन पर भ्रष्टाचार के खूब आरोप लगे और उनकी ही पार्टी के कुछ सदस्यों ने अध्यक्ष पद से उनके इस्तीफे की मांग कर डाली। गडकरी की वजह से भाजपा के लिए भी असहज स्थिति पैदा हुई, लेकिन गडकरी पद पर बरकरार हैं।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे के बयानों ने उन्हें चौतरफा आलोचनाओं का निशाना बनाया। उन्होंने कथित तौर पर मुंबई में रह रहे बिहार के लोगों को घुसपैठिये कहा और उन्हें बाहर निकाल देने की धमकी दी, जिसके बाद अदालत ने दिल्ली पुलिस को उनके खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। राज के बयान को लेकर एक वकील ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका बयान राष्ट्रविरोधी और उकसाने वाला था।

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भाजपा के दिल्ली इकाई के अध्यक्ष विजेन्दर गुप्ता के बयानों को लेकर उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया। शीला ने आरोप लगाया कि गुप्ता ने 15 अप्रैल को स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान उनके खिलाफ असभ्य भाषा का उपयोग किया। अदालत ने शीला के वकील को चेतावनी दी कि या तो शीला खुद अदालत में पेश हों या फिर मामला खारिज कर दिया जाएगा।

पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अंबुमणि रामदास पर अपने पद का दुरुपयोग कर इंदौर के एक मेडिकल कॉलेज को छात्रों के प्रवेश की अनुमति देने का आरोप लगा, जबकि मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त अकादमिक अवसंरचनाएं नहीं थीं। सीबीआई ने रामदास के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया।

जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने सीबीआई की विशेष अदालत में याचिका दायर कर वित्त मंत्री पी चिदंबरम को 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में आरोपी बनाए जाने की मांग की, लेकिन याचिका खारिज कर दी गई। चिदंबरम को 4 जनवरी को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने क्लीन चिट देते हुए कहा कि वह पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा द्वारा किए गए निर्णयों से किसी भी तरह का आर्थिक लाभ लेने के आपराधिक षड्यंत्र में शामिल नहीं थे। 2-जी स्पेक्ट्रम मामले में मुख्य आरोपी ए राजा के खिलाफ सुनवाई चल रही है, लेकिन 15 माह तक जेल में रहने के बाद इस साल उन्हें अदालत से जमानत मिली और वह रिहा हो गए।

साल के आखिर में एक अदालत ने राष्ट्रमंडल खेल परियोजनाओं में अनियमितताओं के मामले में कांग्रेस के सांसद सुरेश कलमाड़ी के खिलाफ अपने पद का कथित तौर पर दुरुपयोग कर सरकारी खजाने को 90 करोड़ का चूना लगाने के लिए आरोप तय करने का आदेश दे दिया।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पुत्र एवं सांसद अभिजीत मुखर्जी ने राजधानी दिल्ली में पैरा मेडिकल छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों में शामिल महिलाओं को अत्यधिक रंगी पुती कह कर खासा विवाद खड़ा कर दिया और आलोचनाओं में घिर गए। बाद में उन्होंने माफी मांगी।

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