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कुप्रबंधन है मुद्रास्फीति का कारण: अभिजीत सेन

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:06-01-2013 06:01:51 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

योजना आयोग के सदस्य अभिजीत सेन ने ऊंची मुद्रास्फीति के लिए खाद्य प्रणाली के कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है और हालात से निपटने के लिए व्यापार तथा अन्य नीतियों में बेहतर तालमेल की आवश्यकता रेखांकित की है।

उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि मुद्रास्फीति का प्रमुख स्रोत अनाज का मामला है और यह स्पष्ट रूप से खाद्य प्रणाली के कुप्रबंधन का मामला है। यह उत्पादन में कमी नहीं है।

थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में पिछले साल की तुलना में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि भारत के पास भारी भंडार है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास कोई दीर्घकालिक मूल्य नीति नहीं है जो किसानों को उनके उत्पादों की कीमत की गारंटी देती हो।

सेन ने कहा कि खाद्य प्रणाली के कुप्रबंधन का मतलब है कि ऐसी दीर्घकालिक मूल्य नीति का अभाव जो यह कहे कि हम किसानों को यह देने की गारंटी देते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास गेहूं का बड़ा भंडार है लेकिन सरकार इसे उस दर पर जारी करने की इच्छा नहीं करखती जिससे कीमतें घटनी चाहिएं क्योंकि समर्थन मूल्य इतना ऊंचा है कि वह घाटे वाली किसी भी दर पर बेचना नहीं चाहती।

सरकार ने दिसंबर में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 65 रुपए प्रति क्विंटल बढाकर 1,350 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया। सेन ने व्यापार नीति की अन्य नीतियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि व्यापार नीति तथा घरेलू नीति के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए। वैश्विक कीमतों में बहुत उतार-चढ़ाव है।

इसलिए हमें हमारी कीमतों में अधिक लचीलापन चाहिए। कीमतों में वैश्विक कीमतों के हिसाब से विविधता होनी चाहिए और हम निर्यात या आयात पर प्रतिबंध लगाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि शुल्क दरों में विविधता के लिए सतत आकलन जरूरत है और भारत में उस तरह का सतत आकलन नहीं है।

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