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हंगामे से फिर गर्म रह सकता है संसद का शीतसत्र

नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान First Published:27-11-2012 09:52:11 AMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
हंगामे से फिर गर्म रह सकता है संसद का शीतसत्र

संसद में शीतसत्र का आज चौथा दिन है। बीते तीन दिनों में संसद एक दिन भी नहीं चल पाई। आज भी संसद चलने के आसार कम ही दिखाई दे रहे हैं। मामला रिटेल में एफडीआई के सवाल पर फंसा हुआ है।

गौरतलब है कि एफडीआई पर संसद में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए सोमवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक फिर बेनतीजा रही। बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वह नियम 184 के तहत ही चर्चा चाहती है यानी बहस के बाद वोटिंग भी हो।

संसद भवन परिसर में करीब दो घंटे चली सर्वदलीय बैठक के बाद लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने संवाददाताओं से कहा कि हमारी पार्टी मत विभाजन के प्रावधान के तहत चर्चा कराने पर अडिग है और इस पर समझौते का सवाल ही नहीं है। यह चर्चा लोकसभा में नियम 184 के तहत और राज्यसभा में नियम 168 के तहत करायी जाए।

उन्होंने कहा कि मतविभाजन के प्रावधान के तहत होने वाली चर्चा में ही राय व्यक्त की जा सकती है। सुषमा ने कहा कि हमने सरकार के सामने अपनी बात रख दी है और अब गेंद सरकार के पाले में है।

यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा संसद की कार्यवाही नहीं चलने देगी, उन्होंने कहा कि जब मैं कह रही हूं कि समझौते का सवाल नहीं है, तो इसका कुछ मतलब होता है।

सरकार का कहना है कि वह मंगलवार को अपने घटक दलों से बात करके इस मुद्दे पर चर्चा कर कोई फैसला करेगी। लेकिन इस बैठक में सपा हिस्सा नहीं लेगी।

इससे पहले सूत्रों से हवाले से खबर मिली थी कि एफडीआई के मसले पर भाजपा और वामदल संसद द्वारा वोटिंग वाले नियम के तहत चर्चा कराने की माग पर सरकार लगभग सहमत हो गई है। मगर बैठक खत्म होने के साथ सभी अटकलों पर विराम लग गया है।

वोटिंग के नियम के तहत ही चर्चा पर अड़े भाजपा और वाम दलों को बाकी विपक्षी दलों और खासकर खुद को बाहर से समर्थन दे रहे दलों को सरकार अलग-थलग करने में जरूर सफल रही। लेकिन भाजपा, जद-यू और तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर किसी भी कीमत पर वोटिंग से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

सपा-बसपा ने भी एफडीआई पर चर्चा किस नियम तहत हो, यह मामला दोनों सदनों के अध्यक्षों पर छोड़ने को कह दिया। इसके बावजूद हालात में कोई फर्क नहीं आया है। भाजपा नेतृत्व वाला राजग और वाम दलों ने भी साफ कह दिया है कि वह बगैर वोटिंग के चर्चा के लिए तैयार नहीं है।

इधर, अपने पक्ष में आकड़ों को लेकर आशंकित सरकार मत विभाजन के तहत चर्चा की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। इन सबके बीच संसद की कार्यवाही तीसरे दिन भी नहीं चली।

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