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पाकिस्तानी न्यायिक आयोग जनवरी के अंत तक भारत आएगा

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:01-01-2013 08:53:42 PMLast Updated:01-01-2013 10:04:01 PM
पाकिस्तानी न्यायिक आयोग जनवरी के अंत तक भारत आएगा

मुंबई हमले के चार गवाहों से जिरह करने के लिए पाकिस्तानी न्यायिक आयोग के जनवरी के अंत तक भारत आने की उम्मीद है। गृह मंत्रालय एक दो दिन में बंबई उच्च न्यायालय का रुख कर पाकिस्तानी आयोग के दौरे के लिए अदालत की इजाजत लेगी। दूसरे पाकिस्तानी न्यायिक आयोग के मुंबई दौरे के बारे में इस्लामाबाद में 25 दिसंबर को एक समझौते को अंतिम रूप दिया गया था। इससे पहले जटिल तकनीकी और कानूनी मुद्दों पर चार सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई थी।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय मुंबई हमला मामले में पाकिस्तानी आयोग के दौरे और चार गवाहों से उसके जिरह किये जाने के बारे में बंबई उच्च न्यायालय की इजाजत लेने के लिए एक दो दिन में अदालत का रूख करेगी। गवाहों में मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट राम विजय सावंत वाघले, मुख्य जांच अधिकारी रमेश महाले और सरकारी अस्पताल नायर एंड जेजे हॉस्पिटल के दो चिकित्सक शामिल हैं। इन दो चिकित्सकों ने इस हमले में मारे गए नौ आतंकवादियों के शव का परीक्षण किया था। वहीं, वाघले ने अजमल कसाब का इकबालिया बयान दर्ज किया था।

मुंबई हमला मामले को रावलपिंडी की एक अदालत में तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए चारों गवाहों के साथ आयोग की जिरह आवश्यक है। लश्कर ए तैयबा के ऑपरेशन कमांडर जकीउर रहमान लखवी सहित सात आतंकवादियों को नवंबर 2008 के इस हमले की साजिश रचने, धन मुहैया कराने और हमले को अंजाम देने के सिलिसले में आरोपित किया गया है।

बंबई उच्च न्यायालय की इजाजत मिल जाने पर नई दिल्ली इस बात से पाकिस्तान को अवगत करा देगा। इसके बाद पाकिस्तान की सरकार वहां की अदालत को इस बारे में सूचना देगी। भारतीय दल ने इस सिलसिले में पाकिस्तान की यात्रा के दौरान वहां के अधिकारियों से यह आश्वासन लिया था कि दूसरे न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को आतंकवाद निरोधक अदालत सरसरी तौर पर देखकर ही खारिज नहीं कर देगी। इस हमले के मामले में रावलपिंडी की अदालत में सात लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है।

गौरतलब है कि मार्च 2012 में भारत के दौरे पर आए पाकिस्तानी आयोग ने जो जानकारियां जुटाई थी उसे आतंकवाद निरोधक अदालत ने खारिज कर दिया था क्योंकि आयोग के सदस्यों को भारतीय गवाहों से जिरह करने की इजाजत नहीं दी गई थी। बहरहाल, विभिन्न तकनीकी एवं कानूनी मुद्दों के चलते पाकिस्तानी संदिग्धों के खिलाफ अदालती कार्यवाही में थोड़ी सी या नहीं के बराबर प्रगति हुई है।

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