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दक्षिण भारतीयों की भूमिका सही ढंग से पेश नहीं: चिदंबरम

दक्षिण भारतीयों की भूमिका सही ढंग से पेश नहीं: चिदंबरम

केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में दक्षिण भारतीय लोगों द्वारा निभाई गई भूमिका को सही तरीके से पेश नहीं किया गया, जबकि 1857 के सिपाही विद्रोह से एक शताब्दी पहले ही दक्षिण भारतीयों ने सबसे पहले ब्रिटिश राज का विरोध किया था।

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के वीरन अक्षगू मुथु कोने पर 20 मिनट का एक वृत्तचित्र जारी करते हुये उन्होंने कहा कि फिर भी किताबों में ब्रिटिश राज के खिलाफ पहले स्वतंत्रता संघर्ष के रूप में केवल सिपाही विद्रोह का उल्लेख किया गया है।

उल्लेखनीय है कि कोने 17-18वीं शताब्दी में भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माने जाते हैं। चिदंबरम ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि इस विद्रोह से करीब 100 साल पहले कोने ने ब्रिटिश एजेंटों के खिलाफ लोहा लिया था।

उन्होंने कहा कि इसके बाद सेनापति वीरापंडिया कटटाबोम्मन और पुलितेवन ने ब्रिटिश लोगों के खिलाफ संघर्ष किया था।

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