Image Loading
बुधवार, 31 अगस्त, 2016 | 04:00 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • अलप्पो शहर में ISIS प्रवक्ता अबू मुहम्मद अल अदनानी की मौत: अमाक़ न्यूज़ एजेंसी
  • इंग्लैंड ने पाकिस्तान के खिलाफ वनडे का सबसे बड़ा स्कोर बनाया, उसने 444 रन बनाए

चाय की दुकान से चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का सफर

गांधीनगर, एजेंसी First Published:20-12-2012 02:44:45 PMLast Updated:20-12-2012 10:25:23 PM
चाय की दुकान से चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का सफर

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को एक मध्यवर्गीय परिवार में मेहसाणा जिले के चडनगर में हुआ था। पिछले 10 साल से राज्य के मुख्यमंत्री रहे मोदी ने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। अपने प्रारंभिक काल में वह अपने पिता और भाई को चाय की स्टाल चलाने में मदद करते थे।

कालेज के दिनों में मोदी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता थे। गुजरात में भाजपा की नींव डालने में मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शंकरसिंह बाघेला और केशुभाई पटेल के साथ साथ मोदी ने भी राज्य में भाजपा को गांव गांव तक पहुंचाया। वाघेला और मोदी एक दूसरे के पूरक माने जाते थे। वाघेला एक जननेता के रुप में जाने जाते थे, जबकि मोदी पर्दे के पीछे संगठन का काम करते थे।

1995 में जब भाजपा गुजरात में अपने बलबूते पर सत्ता में आई, तब वाघेला और मोदी के बीच टकराव हुआ। इस बीच मोदी ने पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या रथयात्रा और मुरली मनोहर जोशी की कन्याकुमारी से कश्मीर की रथयात्रा का सफल संचालन करके अपना संगठनात्मक कौशल साबित कर दिया।

शीघ्र ही मोदी को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। उन्हें पांच राज्यों का भार सौंपा गया। 1998 में उन्हें गुजरात और हिमाचल प्रदेश में पार्टी का चुनाव प्रचार का कार्य सौंपा गया, जो उन्होंने सफलतापूर्वक किया।

राज्य में विनाशकारी भूकंप और 2001 के उपचुनावों में भाजपा की हार के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री केशूभाई पटेल को पार्टी ने पदच्युत किया गया और राज्य की बागडौर मोदी को सौंप दी। मोदी उन कुछ मुख्यमंत्रियों में से हैं, जो चुनाव लड़े बिना मुख्यमंत्री बने।

गोधराकांड और उसके बाद की हिंसा से गुजरात और मोदी की छवि पर दाग लगा। परन्तु उसके बाद के चुनावों में भाजपा को 127 सीटों के साथ भारी बहुमत मिला। वर्ष 2007 में उन्होंने फिर पार्टी को विजयी बनाया।

परन्तु उनके प्रधानमंत्री बनने की राह में गोधरा दंगे मुख्य अड़चन के रूप में खड़े हैं। हालांकि उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल टीम ने उन्हें गोधराकाण्ड में निर्दोष करार दिया है। परन्तु उनके खिलाफ दंगा पीड़ितों को न्याय नहीं दिलाने का आरोप तो है ही।

लाइव हिन्दुस्तान जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
 
अन्य खबरें
 
देखिये जरूर
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
संबंधित ख़बरें