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सरकार बनाने की कवायद में मोदी, आडवाणी को स्पीकर बनाने की पेशकश

सरकार बनाने की कवायद में मोदी, आडवाणी को स्पीकर बनाने की पेशकश

सोलहवीं लोकसभा के नतीजों को अपने पक्ष में मानकर चल रही भाजपा में सरकार बनाने की कवायदें तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने सरकार बनाने की कमान संभालते हुए गांधीनगर में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह, पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी व राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली के साथ लंबी मंत्रणा की है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को उनके कद को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष बनाने की पेशकश की गई है। सुषमा स्वराज व मुरली मनोहर जोशी सरकार भावी सरकार में रहेंगे, लेकिन रायसीना हिल के सीमित मंत्रालयों में उनको शामिल करने पर मशक्कत जारी है।

संघ नेतृत्व ने नरेंद्र मोदी को सरकार बनाने की खुली छूट देते हुए यह भी साफ कर दिया है कि सरकार में दो शक्ति केंद्र नहीं होंगे। यही वजह है कि पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा आडवाणी को राजग की भावी सरकार में संप्रग सरकार में सोनिया गांधी की तरह भूमिका देने से संघ ने साफ इंकार कर दिया है।

आडवाणी अभी राजग के कार्यकारी अध्यक्ष व भाजपा संसदीय दल के अध्यक्ष हैं। सूत्रों के अनुसार मोदी सरकार बनने के बाद उनके पास दोनों ही भूमिकाएं नहीं रहेगी। ऐसे में उनको लोकसभा अध्यक्ष बनने की पेशकश की गई है, जो न केवल संवैधानिक पद है, बल्कि संसद में प्रोटोकाल में प्रधानमंत्री के ऊपर भी है। बाद में उनको राष्ट्रपति बनाने का विकल्प भी रखा गया है।
संघ ने भावी सरकार में मोदी की मदद के लिए नितिन गडकरी को सभी वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय का काम सौंपा है। इस भूमिका में गडकरी ने आडवाणी से मुलाकात के बाद बुधवार सुबह सुषमा स्वराज से मुलाकात की। गांधीनगर जाने से पहले राजनाथ सिंह भी सुषमा स्वराज से मिलने गए। सुषमा स्वराज ने इसे शिष्टाचार भेंट कहा है।

सूत्रों के अनुसार सुषमा स्वराज नई सरकार में सुरक्षा संबंधी मंत्रिमंडलीय समिति का हिस्सा बनना चाहती है। इसमें विदेश, रक्षा, गृह व वित्त मंत्रालय आते है। डॉ जोशी भी अपने लिए ऐसी ही भूमिका चाहते हैं।

रायसीना हिल को लेकर जद्दोजहद
केंद्र सरकार का सत्ता शीर्ष रायसीना हिल है, जहां राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के दफ्तरों के साथ रक्षा, विदेश, वित्त व गृह मंत्रालय हैं। चार मंत्रालयों के लिए पांच बड़े नेता दावेदार है। इनमें सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी व नितिन गडकरी शामिल हैं। जेटली के अलावा बाकी नामों को लेकर मोदी ने अभी तक पत्ते नहीं खोले हैं।

संघ खुद रखेगा नजर
नरेंद्र मोदी को पूरी छूट देने के बावजूद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नेतृत्व भाजपा के अंदरूनी हालात पर पूरी नजर रखे है। गुरुवार से संघ प्रमुख मोहन भागवत, भैयाजी जोशी, सुरेश सोनी, दत्तात्रेय होसबुले, कृष्णगोपाल समेत अन्य प्रमुख नेता दिल्ली में ही रहेंगे।

17 मई को संसदीय बोर्ड की बैठक
सरकार बनाने पर औपचारिक मुहर लगाने व बड़े नेताओं के बारे में फैसले को अंतिम रूप देने के लिए भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक 17 मई को होगी। नरेंद्र मोदी भी इसी दिन बनारस जाकर मतदाताओं का आभार जताएंगे।

मंत्रालयों को लेकर गहमागहमी
पार्टी में भावी सरकार के मंत्रालयों को लेकर गहमागहमी शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार बड़े नेताओं में वित्त मंत्रालय अरुण जेटली को मिलना तय है। सुषमा स्वराज के लिए विदेश व रक्षा मंत्रालय की चर्चा है। डॉ जोशी भी रक्षा मंत्रालय के दावेदार है। गृह मंत्रालय के लिए राजनाथ सिंह के नाम की चर्चा है, यह तभी होगा जबकि संघ नितिन गडकरी को पार्टी अध्यक्ष बनाने का फैसला करे। गडकरी भी सरकार में आना चाहते हैं। हालांकि संघ का एक खेमा चाहता है कि पूर्ति मामले से बेदाग साबित होने के बाद गडकरी पार्टी अध्यक्ष बने।

मोदी मेट्रो रेल के प्रमुख रहे श्रीधरन को भी रेल मंत्रालय में जोड़ना चाहते हैं। वेंकैया नायडू, अरुण शौरी व यशवंत सिन्हा के लिए भी भूमिकाएं तलाशी जा रही है। उमा भारती को जल संसाधन व गंगा योजना का काम सौंपा जा सकता है।

महाराष्ट्र का बबाल
भाजपा व संघ के सामने महाराष्ट्र की राजनीति भी है। वहां पांच माह बाद चुनाव है। गडकरी व मुंडे दोनों मंत्री बनने के दावेदार है। संघ का एक खेमा चाहता है कि गडकरी मंत्री बनकर महाराष्ट्र के लिए विशेष काम करें ताकि उसका लाभ मिल सके व बाद में वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार बन सके। उधर मुंडे खेमा चाहता है कि राजनाथ मंत्री बने व गडकरी अध्यक्ष। ऐसे में मुंडे को केंद्र में अच्छा पद व बाद में महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री का रास्ता भी खुला रहेगा।

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  • Web Title:भाजपा नेताओं का सरकार बनाने पर मंथन जारी