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अर्जुन मुंडा ने दिया इस्तीफा, विधानसभा भंग करने की सिफारिश

रांची, एजेंसी First Published:08-01-2013 12:52:54 PMLast Updated:08-01-2013 04:13:22 PM

झारखंड के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने मंगलवार को राज्यपाल डॉक्टर सैय्यद अहमद को अपना इस्तीफा सौंप दिया। मुंडा ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद कहा कि उन्होंने विधानसभा भंग करने की सिफारिश भी की है।

उन्होंने कहा कि वह पिछले दो साल से राज्य में स्थिर सरकार देने का प्रयास कर रहे थे और अपनी इस कोशिश में कामयाब भी रहे, लेकिन वर्तमान राजनीतिक स्थिति में नया जनादेश ही एकमात्र विकल्प बचा है।

उन्होंने बताया कि बैठक में उनके 12 सदस्यीय मंत्रिमंडल के सात सदस्य मौजूद थे, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा के पांच मंत्रियों ने बैठक में भाग नहीं लिया। उधर सुबह साढे दस बजे झामुमो ने सरकार से समर्थन वापसी का पत्र राज्यपाल सैयद अहमद को सौंप दिया। इस बीच राज्यपाल ने मुंडा को सुबह साढे ग्यारह बजे मिलने का समय दिया है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कल ही अर्जुन मुंडा के नेतत्व वाली राज्य सरकार से अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा कर दी थी, जिसके चलते यह सरकार अल्पमत में आ गयी थी।

मुंडा ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के सरकार से समर्थन वापसी के बाद किसी भी राष्ट्रीय दल के राज्य में वैकल्पिक सरकार के लिये खुलकर दावेदारी नहीं करने के बाद विधानसभा भंग करने की सिफारिश करने का फैसला किया गया।

ग्यारह सितम्बर 2010 में राज्य में सत्ता संभालने वाले मुंडा ने राज्य में विधायकों की खरीद फरोख्त या किसी तरह की सौदेबाजी रोकने के इरादे से लिये गये विधानसभा भंग के फैसले की जानकारी देने के बाद संवाददाताओ से कहा कि हमने राज्यपाल सैयद अहमद से मिलने का समय मांगा है, ताकि उन्हें मंत्रिमंडल के फैसले से अवगत करा सकें।

इस बीच राजभवन सूत्रों ने बताया कि झामुमो ने अर्जुन मुंडा सरकार से समर्थन वापसी का अपना पत्र राज्यपाल को सौंप दिया है। इससे पहले राज्य की भाजपा-झामुमो-आज्सू-जदयू गठबंधन सरकार को बचाने के अंतिम प्रयास के तौर पर मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कल झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन और उनके बेटे तथा उपमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर बंद कमरे में लगभग 40 मिनट तक बातचीत की थी।

सोरेन के घर पर झामुमो कोर समिति और जिलाध्यक्षों की बैठक के बाद झामुमो में उठ रही मुंडा सरकार से समर्थन वापसी की मांग को ठंडा करने और सोरेन को मनाने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री वहां गये थे। लेकिन उन्हें वहां कोई सफलता नहीं मिल पाने के बाद आज सुबह राज्य मंत्रिमंडल की बैठक कर विधानसभा भंग करने की सिफारिश करने का फैसला किया गया।

सोरेन इस बात से आहत थे कि उनके 28-28 माह के कार्यकाल के रूप में सत्ता में भागीदारी के उनके दावे को मुख्यमंत्री ने तीन जनवरी के अपने पत्र में लिखित तौर पर झुठला दिया था। झामुमो ने समर्थन वापसी का निर्णय लेने से पहले भाजपा के कई नेताओ से बातचीत की थी, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाने के बाद यह कदम उठाया।

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