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सीएम केजरीवाल की राह पर Iron Lady इरोम शर्मिला, लड़ेंगी चुनाव

नई दिल्ली, लाइव हिंदुस्तान टीम। First Published:19-10-2016 01:15:04 PMLast Updated:19-10-2016 01:15:04 PM
सीएम केजरीवाल की राह पर Iron Lady इरोम शर्मिला,  लड़ेंगी चुनाव

16 साल तक सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) को हटाने की मांग पर अनशन कर चुकीं मणिपुर की आयरन लेडी इरोम शर्मिला ने मंगलवार को अपनी राजनीतिक पार्टी का गठन किया है। इसी साल 9 अगस्त को भूख हड़ताल तोड़ने वाली इरोम की पार्टी का नाम पीपल्स रीसर्जेन्स एंड जस्टिस एलायन्स (प्रजा, PRAJA) है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरह ही 44 वर्षीय इरोम ने मणिपुर के वर्तमान सीएम के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा की है।

इरोम ने 2002 से लगातर मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकरम इबोबी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा की है। वह सीएम के विधानसभा क्षेत्र थोउबल के अलावा खुरई से चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने उम्मीद जताई है कि वह मणिपुर की 60 में से 20 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े कर पाएंगी। आपको बता दें कि अनशन तोड़ने के बाद इरोम ने दिल्ली आकर आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की थी। उन्होंने चुनाव तैयारियों और राजनीतिक पार्टी के गठन के लेकर केजरीवाल से सलाह ली।

10 मणिपुरी युवकों की मौत के बाद शुरू किया संघर्ष

मणिपुर की राजधानी इंफाल में इरोम का जन्म 14 मार्च, 1972 को हुआ था। उनके घर का नाम 'चानू' है। 16 साल पहले इंफाल के मालोम इलाके में असम राइफल की गोलीबारी में मारे गए 10 मणिपुरी युवकों की मौत के बाद 2 नवंबर, 2000 को इरोम भूख हड़ताल पर बैठी थीं। उस समय इरोम केवल 28 साल की थीं। उन्होंने अपनी जिंदगी के आधे से अधिक समय तक अफ्सपा हटाने की मांग को लेकर अनशन किया। कई मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इस कानून की आड़ में 'फर्जी' मुठभेड़ों को अंजाम दिया गया है। हालांकि, सेना अलगाववाद और आतंकवाद से निपटने के लिए इस कानून को जरूरी मानती हैं।

खुदकुशी के आरोप में गिरफ्तारी

अनशन शुरू करने के तीन दिन बाद ही उन्हें आईपीसी की धारा 309 के तहत खुदकुशी की कोशिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इसी आरोप में इरोम को पिछले 16 साल में ज्यादातर समय हिरासत में रहीं। इंफाल के जवाहर लाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के स्पेशल वार्ड का कमरा नंबर एक ही शर्मिला का घर रहा है। इस दौरान इरोम ना तो अपने घर गईं और ना ही अपने मां से मिलीं। आपको यह जानकर आश्चर्य हो सकता है कि उनकी मां ने अस्पफा नहीं हटने तक अपनी बेटी से नहीं मिलने का निर्णय लिया है।

16 साल तक नली के जरिए भोजन

गिरफ्तारी के बाद उन्हें नाक के रास्ते एक ट्यूब की मदद से भोजन दिया जाता था। सेरेलक, एप्पी जूस, हॉर्लिक्स और प्रोटीन शेक के जरिए उन्हें हर दिन 16 हजार कैलोरी की खुराक दी गई। इस दौरान उनका देखभाल कर रहे है डॉक्टरों ने बताया कि खाना न खाने की वजह से उनकी हड्डियां बहुत कमजोर हो गई हैं। अनशन के दौरान उन्हें तीन बार जबर्दस्ती नाक के जरिए खाना खिलाया गया है। इस दौरान उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी हुई।

क्या है AFSPA

1958 में पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद की समस्या से निपटने के लिए संसद द्वारा सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) पारित किया गया था। इसके बाद 1990 में इस कानून को जम्मू-कश्मीर में लागू किया गया। इस कानून के तहत सेना को किसी भी व्‍यक्ति को बिना कोई वारंट के तलाशी या गिरफ्तार करने का विशेषाधिकार है। इस कानून के अनुसार सेना के जवानों को कानून तोड़ने वाले व्‍यक्ति पर फायरिंग भी अधिकार है।

इस कानून की धारा-4 के तहत सेना को कानून-व्यवस्था बहाल रखने के लिए बिना वारंट के उपद्रवी तत्वों की तलाशी, प्राणघातक होने की हद तक बल प्रयोग, और संपत्ति जब्त या नष्ट करने का अधिकार है। कानून की धारा-6 के तहत सेना के जवानों पर केंद्र सरकार की अनुमति बगैर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती और न ही अभियोजन चलाया जा सकता है।

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