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विश्व मंच ने इस साल भी माना भारतीयों का लोहा

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:17-12-2012 11:50:17 AMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
विश्व मंच ने इस साल भी माना भारतीयों का लोहा

वैश्विक विकास में भारतीयों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस साल भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भारतीयों ने अपनी मेधा का परचम लहराया।

भारत की ओर से नामित न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी अप्रैल में भारी बहुमत से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के न्यायाधीश के तौर पर निर्वाचित किए गए। संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद दोनों स्थानों पर 64 वर्षीय न्यायमूर्ति भंडारी ने फिलीपीन के फलोरेंतिनो फेलिसिआनो को मात दी। महासभा में उन्होंने 122 और सुरक्षा परिषद में 15 में से 13 मत हासिल किए।

इसी माह भारतीय मूल के उद्यमी और शिक्षाविद सनी वर्के को संयुक्त राष्ट्र की शैक्षिक एवं सांस्कतिक एजेंसी यूनेस्को का सदभावना दूत नियुक्त किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में वर्के के अहम योगदान के मददेनजर उन्हें यूनेस्को का सदभावना दूत नियुक्त किया गया।

भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बिनाय जॉब को मार्च में वर्ल्ड इकोनोमिक फोरम ने यंग ग्लोबल लीडर पुरस्कार प्रदान किया। सामाजिक बदलाव में मीडिया के इस्तेमाल में बिनाय की भूमिका को देखते हुए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

पंजाब विधान सभा के अध्यक्ष डॉक्टर चरणजीत अटवाल को अपने राज्य में प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिये एशियन गिल्डस के विशेष अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

एशियन गिल्ड के अध्यक्ष लार्ड तरसेम किंग ने लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष अटवाल को नवंबर के पहले सप्ताह में लंदन स्थित हाउस आफ लार्डस में एशियन गिल्ड एन्युअल अवार्डस डिनर 2012 में सम्मानित किया।

नवंबर के ही पहले सप्ताह में उपन्यासकार किरण नागरकर और उद्योगपति बाबासाहब कल्याणी को भारत-जर्मनी के रिश्तों में उनके योगदान के लिए जर्मनी के क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मेरिट के प्रतिष्ठित बुंदेस्वरदीनस्तक्रूज पुरस्कार से नवाजा गया। बाबासाहब कल्याणी भारत के सफल उद्यमी हैं जिनका जर्मनी से गहरा रिश्ता रहा है, वहीं नागरकर जर्मनी में भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय लेखक हैं।

गरीब बच्चों को आईआईटी जेईई की तैयारी कराने वाले गणितज्ञ आनंद कुमार द्वारा स्थापित संस्था सुपर 30 की ख्याति सुनकर लंदन की प्रख्यात फोटोग्राफर ओलिविया आर्थर नवंबर के दूसरे सप्ताह में पटना पहुंचीं और संस्थान तथा उसके विद्यार्थियों के जीवन के विविध रंगों को अपने कैमरे में कैद किया।

लंदन के रॉयल फोटोग्राफिक सोसायटी के ओडेन पुरस्कार और पेरिस की सोसाइटी से सम्मानित ओलिविया ने इससे पहले भी भारत के विषयों के अलावा सउदी अरब की परदा नशीं महिलाओं सहित अन्य विषयों के चित्र उतारे हैं। सुपर 30 में उन्होंने गरीब और मेधा के सशक्तिकरण का एक सफल प्रयोग देखा। अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में अपनी तस्वीर लगाने वाली ओलिविया की प्रदर्शनी का अगला विषय सुपर 30 है।

भारतीय मूल के जीव वैज्ञानिक डॉक्टर कमल बावा को वैश्विक सतत विकास की दिशा में विज्ञान के क्षेत्र में किए गए उनके श्रेष्ठ कार्य के लिए रॉयल नार्वियन सोसायटी ऑफ साइंसेज एंड लेटर्स (डीकेएनवीएस) की ओर से 17 अप्रैल को जनरस सस्टेनेबिलिटी अवार्ड दिया गया।

जनरस सस्टेनेबिलिटी अवार्ड विज्ञान के क्षेत्र में दिया जाने वाला पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है।

ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में एशिया के योगदान को सम्मानित करने के लिए प्रवासी भारतीय कारोबारी तेज लालवानी को 2012 के युवा उद्यमी पुरस्कार के लिए चुना गया। लालवानी वीटाबायोटिक्स के वैश्विक परिचालन के उपाध्यक्ष हैं और उन्होंने अपने पिता कर्तार लालवानी की उपलब्धियों में चार चांद लगाया।

कभी मलिन बस्ती में रहने वाले और अब चेन्नई में खाद्यान्न उद्योग संभालने वाले सरत बाबू इलूमलाई उन तीन युवाओं में शामिल थे, जिन्हें विश्वबैंक के वार्षिक कार्यक्रम ग्लोबल यूथ कांफ्रेंस के लिये विश्वभर से आमंत्रित किया गया। सम्मेलन की विषयवस्तु यूथ अनएंप्लायमेंट : एंपावरिंग सोल्यूशन थ्रू इनोवेशन एंड इन्क्लूजन थी।

अमेरिका में रहने वाले भारतीय शेफ विकास खन्ना की रसोई पर लिखी किताब फ्लेवर्स फर्स्ट: एन इंडियन शेफस कुजमनरी जर्नी को महत्वपूर्ण बेंजामिन फ्रेंकलिन पुरस्कार प्रदान किया गया। फ्लेवर फर्स्ट में खन्ना के शेफ बनने की दास्तान है और इसमें हाथ से बनी रोटी, विभिन्न किस्म की चटनी, ठंडे पेय पदार्थ आदि भारतीय व्यंजनों का जिक्र है।

रंगभेद की नीति का विरोध करने वाले भारतीय मूल के अहमद कर्थडा को जोहान्सबर्ग शहर के सर्वोच्च सम्मान फ्रीड़ा ऑफ द सिटी से नवाजा गया। सालों तक जेल में कैद रहे अहमद कर्थडा नेल्सन मंडेला के बाद पांचवे व्यक्ति हैं जिन्हें यह सम्मान दिया गया है।

भारतीय अर्थशास्त्री तथा 1998 में अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने फरवरी में व्हाइट हाउस में एक शानदार समारोह में नेशनल मेडल्स आफ आटर्स एंड ह्यूमैनिटीज पुरस्कार से सम्मानित किया।

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