Image Loading
शनिवार, 01 अक्टूबर, 2016 | 17:35 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • आगरा में राहुल को लगा बिजली के करंट का झटका, बाल-बाल बचे
  • KOLKATA TEST: दूसरे दिन का खेल खत्म, न्यूजीलैंड का स्कोर 128/7
  • स्मृति ईरानी डिग्री मामला: दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट 6 अक्टूबर को सुनाएगी...
  • काली कमाई घोषित करने वाली योजना से भारत सरकार के खाते में जमा हुए 65250 करोड़ रुपयेः...
  • पाकिस्तान के पेशावर, गिलगिट, चिलास और इस्लामाबाद में भूकंप के झटके
  • KOLKATA TEST: कीवी टीम को लगा चौथा झटका, रोंकी को जडेजा ने किया आउट
  • KOLKATA TEST: कीवी टीम को लगा तीसरा झटका, भुवी ने निकोल्स को किया आउट
  • KOLKATA TEST: न्यूजीलैंड को लगातार दो झटके, ओपनर्स लौटे पवेलियन। स्कोर- 18/2
  • KOLKATA TEST: टीम इंडिया की पहली पारी 316 रनों पर सिमटी, साहा ने जड़ा पचासा
  • उरी आतंकी हमले की जांच पूरी होने तक ब्रिगेड कमांडर को हटाया गया: TV Reports
  • मां शैलपुत्री आज वो सबकुछ देंगी जो आप उनसे मांगेंगे, मां की ये कहानी जानकर आपको...
  • KOLKATA TEST: भारत को लगा आठवां झटका, जडेजा लौटे पवेलियन
  • KOLKATA TEST: भारत-न्यूजीलैंड के बीच दूसरे दिन का खेल शुरू
  • मौसम अलर्ट: दिल्ली-NCR में आज गर्मी रहेगी। पटना, रांची और लखनऊ में मौसम साफ रहेगा।...
  • इस नवरात्रि आपको क्या होगा लाभ और कितनी होगी तरक्की, अपना राशिफल पढ़ने के लिए...
  • जम्मू-कश्मीर: पाकिस्तान की ओर से अखनूर सेक्टर में सीजफायर का उल्लंघन, सुबह 4 बजे...
  • नवरात्रि: आज होगी मां शैलपुत्री की पूजा, जानिए आरती और पूजन विधि-विधान
  • सर्जिकल स्ट्राइक के बाद देशभर में हाई अलर्ट, नीतीश सरकार को बड़ा झटका,...

भारत बनाएगा दुनिया का सबसे बड़ा सौर दूरबीन

कोलकाता, एजेंसी First Published:05-01-2013 04:57:58 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

भारत इस साल के आखिर तक लद्दाख में हिमालय की पहाड़ियों पर दुनिया के सबसे बड़े सौर दूरबीन का निर्माण शुरू कर सकता है। इसके जरिए सूरज से सम्बंधित प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाएगा।

बेंगलुरू के इंडियन इंस्टीट्य़ूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) द्वारा बनाया गया दो मीटर का अत्याधुनिक राष्ट्रीय वृहद सौर दूरबीन भारतीय वैज्ञानिकों को सूरज के अध्ययन के लिए शोध करने में मदद करेगा।

आईआईए के पूर्व निदेशक सिराज हसन ने यहां भारतीय विज्ञान कांग्रेस के एक सत्र में कहा, ''केंद्र सरकार को एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सौंपी गई है। हम इस साल के आखिर तक दूरबीन का निर्माण शुरू कर पाएंगे। परियोजना 2017 तक पूरी हो सकती है।''

परियोजना पर 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे और यह दूरबीन दुनिया के उन कुछ दूरबीनों में से एक होगा, जिसका दिन और रात दोनों वक्त उपयोग किया जा सकता है।

अभी हालांकि दुनिया का सबसे बड़ा दूरबीन हवाई के मौना किया में स्थित 10 मीटर का ऑप्टिकल दूरबीन है, लेकिन यह भारतीय दूरबीन सौर दूरबीनों में सबसे बड़ा होगा।

अब तक दुनिया का सबसे बड़ा सौर दूरबीन मैकमैथ-पीयर्स सौर दूरबीन है, जिसका व्यास 1.6 मीटर है और जो अमेरिका के अरीजोना में किट पीक नेशनल ऑब्जवेटरी में स्थित है।

हसन ने कहा कि पेंगोंग झील के पास मेरक गांव में एक उपयुक्त स्थान का चुनाव कर लिया गया है। यह गांव जम्मू और कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में स्थित है।

आईआईए इस परियोजना की नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान, आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्य़ूट ऑफ ऑब्जरवेशनल-साइंसेज, टाटा इंस्टीट्य़ूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च एंड इंटर-यूनीवर्सिटी सेंटर जैसे वैज्ञानिक संस्थानों की भी सहभागिता रहेगी।

लाइव हिन्दुस्तान जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
क्रिकेट स्कोरबोर्ड