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माले में ठेका बचाने के लिए कानूनी उपाय करेगी GMR

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:04-12-2012 02:24:03 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
माले में ठेका बचाने के लिए कानूनी उपाय करेगी GMR

भारतीय कंपनी जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर ने कहा है कि वह मालदीव में माले हवाई अड्डे के अपने अनुबंध को बचाने के लिए हर संभव कानूनी उपाय करेगी। कंपनी ने साफ कहा है कि उसने वहां इस लिए निवेश नहीं किया है कि कोई उसे क्षतिपूर्ति करके जब चाहे निकाल दे।

जीएमआर के नेतृत्व में कंपनियों का एक समूह माले अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण और परिचालन के लिए 51.1 करोड़ डॉलर का अनुबंध किया था। वहां तख्ता पलट के बाद आई नई सरकार ने इस अनुबंध को संदिग्ध बताते हुए रद्द कर दिया है। माले सरकार ने सिंगापुर हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद कहा है कि वह अपने निर्णय पर अटल है।

जीएमआर माले इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी एंड्रयू हैरिसन ने कहा कि यह क्षतिपूर्ति का प्रश्न नहीं है। हम यहां मुआवजा लेने नहीं आए थे। हमने एक अंतर्राष्ट्रीय निविदा में भाग लिया था और उसे जीत कर हम यहां आए थे। उन्होंने कहा था कि मालदीव की सरकार ने हमें जो सार्वभौमिक गारंटी दी थी। वह आज समझौते की शर्तों का पालन नहीं कर रही है। समझौते में साफ-साफ लिखा है कि अनुबंध रद्द करने पर किन-किन शर्तों का पालन करना होगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या जीएमआर माले हवाई अड्डे का जबरदस्ती अधिग्रहण करने के माले सरकार के निर्णय को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में चुनौती देगी, हैरिसन ने कहा कि हम जो भी कानूनी कदम उठा सकते हैं, उसे जरूर उठाएंगे। हम यह सुनिश्चत करना चाहेंगे कि हमारे कानूनी अधिकार सुरक्षित रहे। ऐसे कुछ अंतर्राष्ट्रीय कानून हैं, जो हर देश को मानने ही पड़ते हैं।

उल्लेखनीय है कि माले सरकार के 27 नवंबर के निर्णय के खिलाफ जीएमआर समूह को सोमवार को सिंगापुर की अदालत से स्टे ऑर्डर मिला। माले सरकार ने सात दिन के अंदर माले हवाई अड्डा सौंपने का आदेश दे रखा था। पर सिंगापुर के निर्णय की खबर मिलने के तुरंत बाद मालदीव ने कहा कि उसका निर्णय नहीं बदलेगा। जीएमआर के नेतृत्व वाले कंसोर्सियम, मालदीव्स एयरपोर्टस कंपनी लिमिटिड और मालदीव सरकार के बीच माले हवाई अड्डे के परिचानल का अनुबंध 25 साल के लिए था।

एंड्रयू ने कहा कि अनुबंध के हिसाब से मालदीव सरकार अनुबंध खत्म करने या अनुबंध के समाप्त होने पर इस परियोजना के लिए कर्ज देने वाले एक्सि बैंक के हितों की रक्षा करेगी और 60 दिन के अंदर मुआवजा देने के बाद ही अनुबंध दूसरे किसी को सौंपा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मालदीव सरकार ने 60 दिन का नोटिस नहीं दिया और न ही एक्सिबैंक का पैसा लौटाया गया है।

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