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भारत में दुष्कर्म के प्रति रवैया गलत: ह्यूमन राइट्स

न्यूयार्क, एजेंसी First Published:30-12-2012 10:27:50 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

वूमन राइट्स वाच ने रविवार को कहा कि भारत में दुष्कर्म के प्रति सरकारी रवैया अनौपचारिक व अप्रत्याशित और अक्सर 'अपमानजनक और अनुपयोगी' होता है।

अमेरिका आधारित निकाय ने एक बयान में कहा है, ''भारत में यौन हिंसा की शिकार के चिकित्सकीय उपचार और जांच के लिए समरूप न्यायाचार का अभाव है। इस कारण रवैया अनौपचारिक और अप्रत्याशित होता है और सबसे खराब उदाहरणों में यह अपमानजनक और अनुपयोगी होता है।''

मानवाधिकार वाच ने अपनी 2010 की रिपोर्ट में कहा है कि तथाकथित 'फिंगर टेस्ट'  के लगातार इस्तेमाल में इसकी झलक दिखाई देती है। इसमें कहा गया है कि चिकित्सकीय जांच करते हुए कई डॉक्टर अवैज्ञानिक और अनुपयोगी निष्कर्षो को रिकार्ड करते हैं। यह शायद यह पता लगाने के लिए कि पीड़िता 'कुमारी' थी या यौन संबंधों की आदी थी के लिए किया जाता है। अक्सर डॉक्टर, पुलिस और जज संघर्ष या क्षति खास तौर से कौमार्य को हुई क्षति को सबूत के रूप में लेते हैं।

मानवाधिकार वाच ने अपने बयान में भारत सरकार से यौन हमले की सूरत में चिकित्सकीय उपचार और चिकित्सकीय सबूत के लिए राष्ट्रीय मानक और एक समरूप न्यायाचार बनाने की मांग की है। संगठन ने फिंगर टेस्ट को खत्म करने की मांग की है।

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