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हवलदार की मौत बनी पहेली, अब सामने आया नया चश्मदीद

नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान First Published:27-12-2012 09:58:32 AMLast Updated:27-12-2012 11:49:51 AM

गैंगरेप पीड़िता को इंसाफ दिलाने को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान हुई दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल की मौत पर लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब इस मामले में बुलंदशहर निवासी सलीम ने कहा है कि सुभाष तोमर की प्रदर्शनकारियों ने जबरदस्त पिटाई की थी। इस वजह से ही उन्हें चोट आई थीं। बाद में वह भागते हुए गिर पड़े जिस वजह से उनकी मौत हुई। उसने अपने बयान पुलिस को दर्ज कराए हैं।

सलीम ने कहा है कि वह उस वक्त मौके पर मौजूद था जब प्रदर्शनकारियों ने कांस्टेबल सुभाष तोमर पर हमला किया और उनकी पिटाई की। उसके मुताबिक कांस्टेबल को एक पत्थर लगा था, जिसके बाद वह गिर पड़े थे। बाद में तीन युवकों ने उनकी डंडों और जूतों से काफी पिटाई की थी।

युवक ने दावा किया है कि जिस फोटो को बार-बार दिखाकर यह बताया जा रहा है कि सुभाष तोमर भागते हुए गिर पड़े और एक युवक योगेंद्र ने उनकी मदद की, वह सब बाद की कहानी है।

गौरतलब है कि कांस्टेबल की मौत को लेकर योगेंद्र और पाओलिन ने कहा था कि कांस्टेबल सुभाष तोमर की मौत किसी के मारने या पीटने से नहीं हुई है, बल्कि वह भागते हुए अचानक गिर पड़े थे। इससे पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने भी इस बात का दावा किया था कि सुभाष की मौत प्रदर्शनकारियों के मारने-पीटने की वजह से हुई है। उन्होंने कहा था कि उनके शरीर पर चोटों के कई निशान थे।

लेकिन इसके उलट बुधवार को राममनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने कहा कि कांस्टेबल के शरीर पर किसी तरह की चोट का निशान नहीं था। वहीं पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में भी कांस्टेबल के शरीर पर चोट के निशान बताए गए हैं।

परिजनों ने सुभाष तोमर को किसी भी तरह की बीमारी होने से साफ इन्कार किया है। सिपाही के बेटे आदित्य कहते हैं कि रविवार को इंडिया गेट पर प्रदर्शनकारियों ने उनके पिता को धक्का दे दिया था। जिससे उन्हें गंभीर भीतरी चोट लगी। इसकी वजह से ही उनकी मौत हो गई। उन्हें हृदय से संबंधित कोई बीमारी नहीं थी।

भाई देवेंद्र के मुताबिक सुभाष तोमर पूरी तरह स्वस्थ थे तथा ड्यूटी के पक्के थे। उनके असामयिक निधन से परिवार अनाथ हो गया है। उनके परिवार में कमाने वाला कोई सदस्य नहीं है।

प्रत्यक्षदर्शी पाओलिन ने प्रदर्शनकारियों द्वारा सुभाष तोमर को पीटे जाने की बात से इन्कार किया है। इग्नू से फिजिक्स ऑनर्स की छात्रा पाओलिन ने बताया कि घटना वाले दिन सुभाष प्रदर्शनकारियों के पीछे भागते हुए गिरे थे। उन्हें किसी प्रदर्शनकारी ने छुआ तक नहीं था। बाद में तबीयत ज्यादा बिगड़ जाने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जिस समय घटना हुई वह मौके पर अन्य लोगों के साथ खड़ी थी। चार-पाच साथियों के साथ सुभाष तोमर इंडिया गेट की तरफ आ रहे थे। तभी वे अचानक सड़क पर गिर पड़े। अन्य पुलिसकर्मियों का ध्यान उनपर नहीं गया। वह गिरे हुए पुलिसकर्मी के पास पहुंची। उसने देखा कि पुलिसकर्मी पसीने से तर-बतर था।

घटना के दूसरे प्रत्यक्षदर्शी पत्रकारिता का कोर्स कर रहे छात्र योगेंद्र ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने सुभाष के जूते खोले थे और हथेली रगड़ी थी। लोगों ने उनके सीने को दबाकर सांस देने की कोशिश भी की थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। सिपाही के शरीर पर कोई गंभीर चोट के निशान नहीं थे। बेसुध होने के बाद अन्य पुलिसकर्मियों की मदद से उन्होंने सुभाष चंद की वर्दी खोली थी। उस वक्त उनके सीने व दाहिने हाथ में मामूली खरोच के निशान मिले थे।

राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. टीएस सिद्धू का मानना है कि सिपाही सुभाष तोमर की मौत हार्ट अटैक से हुई है। उन्होंने बताया कि जिस वक्त सिपाही को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था वे बेहोश थे तथा स्पष्ट लग रहा था कि उन्हें सदमे की वजह से हृदयघात हुआ है। बाद में उन्हें आईसीयू के वेंटिलेटर पर रखा गया था। लेकिन डॉक्टरों को उनकी सर्जरी की मौका नहीं मिला। उनके सीने व हाथ पर कुछ मामूली चोट के निशान जरूर थे।

इंडिया गेट पर हुए पथराव तथा सिपाही की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने आठ लोगो को पकड़ उन्हें मामले का आरोपी जरूर बना दिया। लेकिन आरोपियों का कहना है कि उनका घटना से कोई लेना-देना ही नहीं है।

आरोपी अमित जोशी ने बताया कि वे रविवार को खरीदारी करने कनॉट प्लेस आए थे। राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पहुंचने पर उन्हें पता चला कि इलाके के सारे रास्ते बंद हैं। बाद में भगवान दास रोड से गुजर रहे थे। तभी 25 पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़ गाड़ी में बिठा लिया।

अमित के साथ आरोपी बनाए गए उनके चचेरे भाई कैलाश जोशी के मुताबिक पुलिसकर्मी उन्हें थाने लेकर चले गए। बाद में पता चला की उनपर दंगा भड़काने और सिपाही की हत्या का प्रयास सहित अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

इस मामले में पुलिस ने नफीस अहमद नामक एक मैकेनिक को भी पकड़ा है। नफीस का कहना है कि वह घटना वाले दिन नार्थ ब्लॉक के समीप शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल था। वह दूसरी तरफ खड़े पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई के संबंध में पूछताछ कर रहा था। तभी वहां सादी वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ गाड़ी में बिठा लिया था।

नई दिल्ली जिला के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त केसी द्विवेदी कहते हैं सुभाष की छाती और गर्दन पर पोस्टमार्टम के दौरान अंदरूनी चोट पाई गई हैं। उनकी तीन पसलियां भी टूटी मिली हैं। पैर पर भी चोट के निशान पाए गए हैं। डॉक्टरों ने चोट की वजह किसी भारी वस्तु से वार करना बताया है।

पुलिस अधिकारियों की मानें तो प्रदर्शनकारियों की पिटाई की वजह से ही सिपाही सुभाष की मौत हुई है। एक अधिकारी का तो यहां तक कहना है कि पिटाई से घायल सिपाही जमीन पर गिरा तो भीड़ में से कुछ लोगों ने उसकी छाती पर से गुजरना शुरू कर दिया। जो उनकी मौत का कारण बना।

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