Image Loading
मंगलवार, 06 दिसम्बर, 2016 | 11:32 | IST
Mobile Offers Flipkart Mobiles Snapdeal Mobiles Amazon Mobiles Shopclues Mobiles
खोजें
ब्रेकिंग
  • जयललिता के सम्मान में और उनकी याद में राज्यसभा की कार्यवाही एक दिन के लिए स्थगित
  • क्लिक कर पढ़ें प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा का ब्लॉग, 'तब कैसे याद किए गए थे...
  • मौसम अलर्टः दिल्ली-एनसीआर, पटना, लखनऊ और देहरादून में कोहरे के बीच रहेगी हल्की...
  • जयललिता के अंतिम दर्शन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जाएंगे चेन्नई
  • भविष्यफल: मेष राशिवालों को आज नौकरी के लिए साक्षात्कार आदि कार्यों के सुखद...
  • हेल्थ टिप्स: सर्दियों में ज्यादा बढ़ता है वजन, कम करने के ट्राई करें ये टिप्स
  • GOOD MORNING: AIADMK प्रमुख जयललिता का निधन, तमिलनाडु में 7 दिन का राजकीय शोक। अन्य बड़ी खबरों...
  • जयललिता का पार्थिव शरीर राजाजी हॉल पहुंचा। आज शाम चार बजे होगा अंतिम संस्कार।
  • तमिलानाडु: पन्नीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
  • पीएम मोदी ने जयललिता के निधन पर दुख जताया, कहा- देश की राजनीति में बड़ी क्षति
  • तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का निधन

जंगलों के सुरक्षा प्रहरी फॉरेस्ट ऑफिसर

प्रियंका कुमारी First Published:28-11-2012 01:16:49 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
जंगलों के सुरक्षा प्रहरी फॉरेस्ट ऑफिसर

पर्यावरण, जंगलों और जंगली जीवों की सुरक्षा फॉरेस्ट अधिकारी का प्रमुख काम है। यह काफी परिश्रम तथा जोखिम वाला काम है। यदि आपकी भी जंगलों में रुचि है और विज्ञान के छात्र हैं तो आप भी फॉरेस्ट अधिकारी बन सकते हैं। इस बारे में बता रही हैं प्रियंका कुमारी

वैश्वीकरण के साथ आज पर्यावरण और वन्य-जीवन पर सबसे ज्यादा खतरा मंडराता नजर आ रहा है। विकास के नाम पर पर्यावरण की बलि चढ़ाई जा रही है। वनों की अंधाधुंध कटाई करके शहरीकरण की योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। आए दिन जंगलों की कटाई होने से न सिर्फ पर्यावरण, बल्कि वन्य-जीवों को भी काफी नुकसान पहुंचा है। ग्लोबल वार्मिंग और आए दिन घटने वाली प्राकृतिक आपदाएं पर्यावरण के नुकसान का ही परिणाम हैं। इस दिशा में बेहतरी के लिए देश-विदेश में पर्यावरण सुधार, वन विस्तार और वन सेवा से संबंधित कई तरह की योजनाएं बनाई जा रही हैं। इन योजनाओं को ही अमलीजामा पहनाने के लिए जिन कुशलकर्मियों और योग्य अधिकारियों की जरूरत पड़ रही है, उनमें फॉरेस्ट ऑफिसर यानी वन अधिकारी एक है। तरह-तरह की चुनौतियों को देखते हुए इस क्षेत्र में करियर के विकल्प छात्रों के लिए हर साल सामने आ रहे हैं। इसके लिए आयोजित होने वाली आईएफएस परीक्षा में हजारों युवा जोर आजमाइश करते हैं। कड़ी प्रतियोगिता के बाद युवा और योग्य व्यक्ति इसमें सफलता की मंजिल तक पहुंच पाते हैं।

संघ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित होने वाली भारतीय वन सेवा परीक्षा में बैठने के लिए स्नातक होना जरूरी है। उम्मीदवार को साइंस, जिसमें पशुपालन, पशुरोग विज्ञान, बॉटनी, जूलॉजी, भौतिकी, गणित, रसायनशास्त्र या सांख्यिकी जैसे विषय हों, में स्नातक डिग्री प्राप्त होना जरूरी है। जिन उम्मीदवारों के परिणाम आने बाकी हैं, वे भी इस परीक्षा में बैठ सकते हैं। परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम 30 वर्ष है। फॉरेस्ट्री, एग्रीकल्चर या इंजीनियरिंग डिग्रीधारक छात्र भी इस दौड़ में शामिल हो सकते हैं।

परीक्षा की अधिसूचना आमतौर पर फरवरी-मार्च में यूपीएससी की ओर से जारी की जाती है। इसके बाद जुलाई माह में परीक्षा आयोजित की जाती है।

परीक्षा की रूपरेखा
भारतीय वन सेवा परीक्षा में छात्रों को कुल छह पेपरों में शामिल होना पड़ता है। इसका पाठय़क्रम काफी बड़ा है, इसलिए तैयारी से पहले इसे भी अच्छी तरह से समझ कर फिर उसकी तैयारी के लिए रणनीति बनानी पड़ती है। छह पेपरों में एक पेपर सामान्य अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान और चार पेपर वैकल्पिक विषयों के होते हैं। इन छह पेपरों के लिए कुल 1400 अंक तय किए गये हैं। सभी पेपरों पर समान रूप से ध्यान देने और मेहनत करने की जरूरत पड़ती है। थोड़ी-सी चूक से सारी मेहनत व्यर्थ हो जाती है।

दो वैकल्पिक विषय के चार पेपर इस परीक्षा में छात्रों के बीच अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। ये पेपर कुल 800 अंकों के होते हैं। चारों पेपरों के लिए 200 अंक निर्धारित किए गये हैं।

वैकल्पिक विषय में कुल चार समूह दिए जाते हैं, जिनमें छात्रों को एक समूह का चयन करना होता है। छात्रों के सामने यह सीमा होती है कि वे एक से अधिक इंजीनियरिंग के पेपर का चुनाव नहीं कर सकते। वैकल्पिक पेपर के विषय तय हैं। ये विषय हैं- कृषि, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, एनिमल हसबैंड्री, वेटेरिनरी, जूलॉजी, बॉटनी, रसायनशास्त्र, कैमिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, फॉरेस्ट्री, जियोलॉजी, गणित, भौतिकी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग व सांख्यिकी आदि।

अनिवार्य पेपर के तहत सामान्य अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान को रखा गया है। इन दोनों ही क्षेत्रों से एक-एक पेपर होता है, जिसके लिए 300-300 अंक निर्धारित किए गये हैं। सामान्य अंग्रेजी में आमतौर पर व्याकरण, वोकेबुलरी, एक्टिव, पैसिव वायस, वाक्य रचना, निबंध लेखन आदि से संबंधित सवाल पूछे जाते हैं। सामान्य ज्ञान में सामाजिक विकास, राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक मुद्दे, अंतरराट्रीय संबंध, भारतीय इतिहास और जियोग्राफी ऑफ नेचर से जुड़े सवाल होते हैं।

परीक्षा से संबंधित पाठय़क्रम परीक्षा से पहले छात्रों को उपलब्ध करा दिया जाता है। इसे देख कर ही छात्र तैयारी करते हैं। छात्रों को परीक्षा की रूपरेखा के बारे में भी विस्तृत तौर पर बताया जाता है। इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग की वेबसाइट देख सकते हैं।

परीक्षा का माध्यम सिर्फ अंग्रेजी है। प्रश्नपत्र भी सिर्फ अंग्रेजी भाषा में होता है। हरेक पेपर के लिए तीन घंटे का समय निर्धारित है।

साक्षात्कार
लिखित परीक्षा के बाद अंतिम रूप से चयन में साक्षात्कार की भी अहम भूमिका होती है। यह 300 अंकों का होता है। इसमें छात्रों से उनकी शैक्षणिक योग्यता, स्किल, समसामयिक मुद्दे, पर्यावरण से जुड़े मसले और अंतरराट्रीय संबंधों से जुड़े सवाल होते हैं। इसमें व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और चुनौतियों का सामना करने के गुण आदि कई चीजों की परख की जाती है।

स्किल
इस क्षेत्र में आने वाले उम्मीदवारों से कई तरह की स्किल की अपेक्षा की जाती है। स्किल सिखाने के लिए उम्मीदवारों को फौजियों की तरह कड़ी ट्रेनिंग से भी गुजरना होता है। विपरीत और विभिन्न तरह की प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने के लिए हथियार चलाना, ऊंचे से ऊंचे पर्वत पर चढ़ना, नौकायन और पर्वतारोहण, घुड़सवारी और जंगल में सड़क बनाने जैसे हुनर सिखाए जाते हैं, इसलिए इस पेशे में शारीरिक फिटनेस भी होनी जरूरी है।

काम के अवसर
चयन के बाद उम्मीदवारों को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री अकादमी में प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद देहरादून की इंदिरा गांधी नेशनल फॉरेस्ट एकेडमी में फॉरेस्ट्री और एलायड विषयों में प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है।

प्रोबेशन पीरियड पूरा होने के बाद डिविजनल फॉरेस्ट अधिकारी या डिप्टी कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट के रूप में काम करने के लिए भेजा जाता है। रैंकिंग के हिसाब से बाद में कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट पद पर पदोन्नति की जाती है। रैंकिंग में चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट, अतिरिक्त प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट, प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर और सबसे ऊपर प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट तक पदोन्नति मिलती है। भारतीय वन सेवा का वरिष्ठतम पद केन्द्र सरकार के पर्यावरण सचिव का पद है। आईएफएस में चयनित उम्मीदवारों की 24 राज्यों में बने कैडर के हिसाब से तैनाती होती है।

वन सेवा में इसके अलावा ग्रीन वायर्स, वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया, वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड, पीपुल फॉर दि एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स यानी पेटा जैसे स्वैच्छिक संगठनों में भी काम के अवसर हैं। इस क्षेत्र में अनुसंधान की भी भरपूर संभावनाएं हैं।

विशेषज्ञ की राय
दिमागी और शारीरिक फिटनेस जरूरी
इन्दू शर्मा, आईएफएस अधिकारी

बीस साल पहले मैं इस सेवा के लिए चयनित हुई थी। उस समय से लेकर आज तक पर्यावरण और वन्य जीवन के क्षेत्र में काफी चुनौतियां सामने आई हैं। आज पर्यावरण से जुड़ा संकट वैश्विक संकट है। गांव से लेकर शहर और जंगल तक, हर जगह पर्यावरण की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। ऐसे में यहां युवाओं के लिए काम करने के बेहतर अवसर हैं। इस परीक्षा में साइंस के छात्र ही शामिल होते हैं। चयन के बाद सबसे महत्वपूर्ण इसकी ट्रेनिंग है, जो करीब दो साल तक चलती है। इसमें छात्रों को कई तरह के हुनर सिखाए जाते हैं। घुड़सवारी, नौकायन, पर्वतारोहण और ऊंची जगहों पर चढ़ाई करने जैसी कई चीजें ट्रेनिंग के दौरान सिखाई जाती हैं। हथियार चलाने से लेकर सड़क तैयार करने की कला भी सिखाई जाती है। देहरादून में दो साल का प्रशिक्षण एमएससी की डिग्री के बराबर होता है। चयनित युवाओं को एमएससी फॉरेस्ट्री के समकक्ष पढ़ा-लिखा माना जाता है। इसके बाद युवाओं की वन सेवा अधिकारी के रूप में काम करने के लिए विभिन्न जगहों पर तैनाती होती है, इसलिए इस क्षेत्र में आने के लिए दिमागी और शारीरिक, दोनों रूप से मजबूत होना चाहिए।

जरूर पढ़ें

 
Hindi News से जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
Web Title:
 
 
 
अन्य खबरें
 
From around the Web
जरूर पढ़ें
Rupees
क्रिकेट स्कोरबोर्ड