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एच-1बी वीजा: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अमेरिका के सामने उठाया का मुद्दा

वॉशिंगटन | एजेंसी First Published:21-04-2017 04:59:57 PMLast Updated:21-04-2017 04:59:57 PM
एच-1बी वीजा: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अमेरिका के सामने उठाया का मुद्दा

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विलबर रोस के समक्ष एच-1बी वीजा के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया है। साथ ही उन्होंने अधिक कुशल भारतीय पेशेवरों की अमेरिका में महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। ट्रंप प्रशासन में पहली बार दोनों देशों के बीच कैबिनेट स्तर की बैठक आयोजित हुई है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में रोस ने जेटली से कहा कि इस मामले की समीक्षा की जा रही है और अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।

एक भारतीय अधिकारी से मिली जानकारी के मुताबिक जेटली ने भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों के मामले को उठाते हुए भारत के आर्थिक विकास में कुशल भारतीयों के योगदान के बारे में बताया। वाणिज्य मंत्री के साथ बैठक में वित्त मंत्री ने कहा कि दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों ने वर्षों में मजबूत रणनीतिक, आर्थिक एवं रक्षा संबंध विकसित किए हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह दोनों देशों के हित में है। याद रहे कि ट्रंप ने इसी हफ्ते सरकारी आदेश पर दस्तखत किए, जिसमें विदेश, श्रम, सुरक्षा एवं न्याय विभागों द्वारा एच-1बी वीजा की समीक्षा बात ही गई है।

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प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे हैं अमेरिका
जेटली अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक की वार्षिक ग्रीष्मकालीन बैठक में भाग लेने के लिए प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हुए हैं। अगले दो दिन वित्त मंत्री का अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इंडोनेशिया तथा स्वीडन के वित्त मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठक करने का कार्यक्रम है। वह बांग्लादेश और श्रीलंका के वित्त मंत्रियों से भी मिल सकते हैं। रविवार को वॉशिंगटन डीसी से न्यूयार्क के लिए रवाना होने से पहले वह शोध संस्थानों तथा चर्चित भारतीय-अमेरिकियों से मिल सकते हैं।

सुधार कार्यक्रमों के बारे में बताया
बैठक के दौरान ऐसा समझा जाता है कि जेटली ने भारत के विकास के बारे में जानकारी दी और मोदी सरकार के वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) समेत नोटबंदी के बाद उठाए गए सुधार कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। जेटली ने कहा कि दोनों देश अगले कुछ साल में द्विपक्षीय कारोबार को 500 अरब डॉलर सालाना पहुंचाने की दिशा में सक्षम होंगे। अधिकारी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के फोन पर तीन बार बातचीत के बाद अधिकारियों की बैठक से पता चलता है कि दोनों सरकारों के बीच रिश्ते और मधुर और मजबूत होने वाले हैं।

क्या है एच-1बी वीजा
इसके तत्काल योजना के तहत 15 दिन में 1225 डॉलर का प्रीमियम चुकाकर वीजा हासिल किया जा सकता है। इसके बिना यह वीजा पाने में औसतन 3 से 6 महीने लगते हैं। अमेरिका ने इस प्रीमियर प्रोसेसिंग पर 6 महीने की रोक लगा दी है।

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नया प्रस्ताव क्यों है चिंताजनक

  • बेहद कुशल पेशेवरों को मिल सकेगा यह वीजा
  • कंप्यूटर प्रोग्रामर कुशल पेशेवरों की सूची से बाहर हो चुके हैं। इससे भारतीय आईटी कंपनियों पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका
  • अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने वालो की मिलेगी तवज्जो


क्यों है विरोध
अमेरिका में बड़े पैमाने पर एच-1बी वीजा का विरोध इसलिए होता रहा है क्योंकि उनका मानना है कि कंपनियां इसका गलत इस्तेमाल करती हैं और आम कर्मचारियों को भी यह वीजा देती है। खुद डोनाल्ड ट्रंप भी चुनाव प्रचार में इसे मुद्दा बना चुके हैं। 2013 में भारतीय कंपनी को ऐसे ही एक मामले में 25 करोड़ रुपये का जुर्माना देना पड़ा था। ओबामा सरकार में भी इसकी फीस 2000 डॉलर से बढ़ाकर 6000 डॉलर कर दी गई थी, जिसका भारत ने कड़ा विरोध किया था।

भारतीयों का दबदबा

  • 85,000 पेशेवरों को हर साल यह वीजा दिया जाता है
  • 75 फीसदी भारतीय होते हैं इसमें
  • 3 लाख के करीब भारतीय एच-1बी वीजा पर अमेरिका में
  • वीजा आवेदन करने के मामले में शीर्ष-10 में शामिल विप्रो, इंफोसिस और टीसीएस

पहले भी बदलते रहे हैं नियम

  • 65,000 सीमा थी वीजा की 1990 में
  • 1,95,000 कर दी गई 2000 में
  • 2004 में फिर से इसे 65,000 कर दिया गया

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