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एलिना ने खेली होली

सुनीता तिवारी  First Published:09-03-2017 01:11:08 PMLast Updated:09-03-2017 01:11:08 PM
एलिना ने खेली होली

एलिना का जन्म स्पेन में हुआ था। वह वहीं पढ़ रही थी। मगर अपने मम्मी-पापा से भारत के बारे में तरह-तरह के सवाल पूछती रहती थी। कैसा है भारत और वहां के लोग- वह अकसर इस बारे में सोचती रहती थी। इस बार तो उसने जिद ही पकड़ ली कि वह अपनी प्यारी दादी से मिलने भारत जाएगी। उसकी बात मम्मी-पापा को माननी पड़ी और वह कुछ ही दिनों में फ्लाइट से भारत आ गई। मार्च का महीना था। ना बहुत गर्मी थी, ना ही बहुत सर्दी। सुबह जल्दी उठकर वह दादी और दादू के साथ सैर करने जाती। वे तीनों बड़े से पार्क में घूमते। दादू तो अपने दोस्तों के साथ व्यायाम करने लगते। दादी-पोती पार्क के पांच चक्कर लगाकर बेंच पर बैठ जातीं। जब तक दादू लौटकर न आते, वह दादी से कहानी सुनती रहती।
आज संडे था। रोज की तरह दादी एलिना को कहानी सुना रही थीं कि आसपास खेल रहे कुछ बच्चे भी उनके पास आ गए। दादी ने मुस्कराकर उन्हें भी बैठने के लिए कहा। बच्चों को दादी से कहानी सुनकर बहुत मजा आया। दादी बोलीं, ‘बच्चो, यह है एलिना, मेरी एकलौती पोती। यह स्पेन में रहती है। हम सबसे मिलने आई है। अब आप सब इससे दोस्ती कर लो। अपने-अपने नाम बताओ।’ बस, सबने एलिना से हाथ मिलाया। वे सब वहीं खेलने लगे।
काफी देर बाद उन बच्चों में से एक रोहन के भैया वहां आए और गुस्से में बोले, ‘घर चलो, मम्मी ने नाश्ता तैयार किया है। सुबह से तुम नहाए भी नहीं हो।’
रोहन के साथ आए सभी बच्चों ने दादी को धन्यवाद कहा और अगले रविवार आने का वादा लेकर चले गए। एलिना के पापा स्पेन में ही थे। उन्हें ऑफिस से छुट्टी नहीं मिली थी। इस कमी को पूरा करने की कोशिश में एलिना रोज रात को पापा को वीडियो कॉल करके भारत के माहौल के बारे में बताती।
अगले दिन दादी ने आलू के पापड़ बनाए। एलिना को आलू के पापड़ बहुत अच्छे लगते थे। दादी पिछली बार जब स्पेन में उनके घर गई थीं तो पापड़ साथ लेकर गई थीं। अगले दिन दादी ने गुझिया बनाईं। एलिना ने गुझिया बनाने मेंं दादी की मदद की। उसके अगले दिन दादी ने सूखे मेवों की चिक्की और तीन तरह की चटनियां बनाईं। फिर दाल के वड़े बनाए। रोज-रोज दादी के हाथ की बनी स्वादिष्ट चीजें खाना एलिना के लिए मजेदार अनुभव था। पिज्जा, पास्ता, बर्गर तो जैसे वह खाना ही भूल गई थी। वह कहती, ‘जब मुझे यहां रहने का मौका मिला है तो मैं यहां की हर चीज का स्वाद चखना चाहती हूं।’
लो आ गया अगला संडे भी। दादी और दादू के साथ एलिना पार्क में गई तो उसके सभी दोस्त पहले से ही आए हुए थे। वह दूर से हाथ हिलाकर बोली, ‘हाय! रोहन, प्रिंस, गौरवी, रिंकू, मधुर, कंगना और प्रियंका। चलो, खेलें।’
‘नहीं, पहले दादी जी से कहानी सुनेंगे।’ प्रिंस ने कहा, तो सभी बच्चे जोर से चिल्लाने लगे, ‘हां, हमें कहानी सुननी है।’
दादी के चेहरे पर खुशी साफ दिख रही थी। एलिना ने दादी की ठोढ़ी को छूकर कहा, ‘दादी मां, आप होली की कहानी सुनाएंगी ना!’ ‘हां, क्यों नहीं। चलो, आज तुम्हें होली की कहानी सुनाती हूं। बहुत समय पहले हिरण्यकशिपु नाम का एक राक्षस राजा था। उसने कई वर्षों तक लंबा तप किया था, जिस कारण उसे भगवान ब्रह्मा से पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली होने का वरदान मिला हुआ था। इस वरदान के कारण वह अहंकारी हो गया। उसे लगने लगा था कि उसे तो कोई मार ही नहीं सकता। वह खुद को भगवान ही समझने लगा। अब उसने घोषणा कर दी कि कोई भी भगवान की पूजा नहीं करेगा, सिर्फ उसकी ही पूजा की जाएगी।’
‘उस समय लोग हिरण्यकशिपु से बहुत डरते थे। उन्होंने डर के कारण उसको ही पूजना शुरू कर दिया। मगर उन डरपोक लोगों में एक बहादुर लड़का भी था, नाम था प्रह्लाद। वह अब भी भगवान की भक्ति ही करता था। मजे की बात तो यह कि वह हिरण्यकशिपु का ही बेटा था। वह अपने बेटे के इस व्यवहार से काफी नाराज रहता था। बहुत समझाने पर भी प्रह्लाद ने जब उसे भगवान मानने से मना कर दिया तो हिरण्यकशिपु ने उसे बेटा ही मानने से मना कर दिया।’
‘प्रह्लाद तो भगवान का भक्त था। भगवान अपने भक्त को हमेशा बचा लेते हैं। अंत में जब हिरण्यकशिपु प्रह्लाद के बात न मानने से तंग आ गया तो उसने अपनी बहन होलिका से मदद मांगी। होलिका के पास एक शाल थी, जिसे ओढ़ने पर आग उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकती थी। उसने प्रह्लाद को गोद में लिया और खुद वह शाल ओढ़ ली। जब आग काफी तेज हुई, लपटें ऊपर उठने लगीं, तो हवा के साथ शाल उड़ी और प्रह्लाद पर आ गई। प्रह्लाद पर भगवान की कृपा थी सो वह बच गया और होलिका आग में जल गई। तो बच्चो, बुरा करने वाले का हमेशा बुरा ही होता है।’
बच्चों ने तालियां बजाईं। अगले दिन होली की छुट्टी थी। बच्चों ने एलिना के साथ होली खेलने की इच्छा रखी। दादी ने सभी बच्चों को सुबह पार्क में आने को कहा। एलिना ने स्पेन में ‘ला टोमेटीना’ देखा हुआ था, जिसमें लोग एक-दूसरे पर टमाटर मारकर खेलते हैं। एक तरह की टमाटर होली होती है वह। मगर रंग लगाकर होली कैसे खेली जाएगी? यह सोच उसे होली खेलने की जल्दी हो रही थी। दादी ने रंग घर में बनाकर दिए। एक मेटल की सुनहरी पिचकारी एलिना को दिलवाई। साथ ही दिलवाया सफेद पाजामा-कुर्ता खास तौर से होली खेलने के लिए। सब बच्चों ने बड़े प्यार से एक-दूसरे को रंग लगाए। पिचकारी से खेली होली। मगर शैतान रोहन और प्रिंस ने एलिना को उठाकर रंग के ड्रम में डुबो दिया। एलिना को नहीं पता था कि इतने प्यार से खेली जाने वाली होली में ऐसा भी हो सकता है। वह कांपते हुए रोने लगी। दादी ने उसे चुप कराया। वह घर कपड़े बदलने दौड़ी तो दादी जी ने उसके दोस्तों को भी घर बुला लिया।
सब बच्चोें को गुझिया, कचौड़ी, हरी-लाल चटनी डालकर दही-भल्ले, कलाकंद आदि खाने को दिये। फिर पिलाई ठंडी-ठंडी ठंडाई। ठंडाई पीकर प्रियंका बोली, ‘वाह, चिल्ड ठंडाई पीकर तो दिमाग तर हो गया।’ इतने में पापा ने आईपैड पर वीडियो कॉलिंग की। वह एलिना को देखते ही जोर से हंसे, ‘तुम तो पहचान में ही नहीं आ रही हो। जल्दी से रंग हटाओ, नहीं तो स्किन एलर्जी हो जाएगी।’ तभी दादी ने कहा, ‘नहीं, हमने यह पहले ही सोच लिया था, इसलिए होली के हर्बल रंग घर पर ही तैयार किए हैं। बस, अब तुम तो हर होली पर एलिना को हमारे पास भेजने का प्रॉमिस करो।’
अभी पापा कुछ जवाब नहीं दे पाए थे कि सभी दोस्तों ने जोर से कहा, ‘थैंक्स अंकल, थैंक्स दादी... आ हा फिर तो बहुत मजा आएगा।’

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