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ई-कॉमर्स कंपनियों की कमाई 14 अरब डॉलर पहुंची

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:31-12-2012 03:58:45 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

इंटरनेट के जरिए घर बैठे डायपर से लेकर किताबें, मकान और यहां तक कि नमक तेल जैसे परचून के सामान खरीदने का चलन जोर पकड़ने से 2012 में ई़-कॉमर्स कंपनियों ने खूब चांदी काटी और उनकी आय 14 अरब डॉलर पहुंच गई।

वास्तव में बढ़ती महंगाई का ई़-कामर्स पोर्टल के कारोबार पर कोई खास असर नहीं पड़ा, क्योंकि इंटरनेट के जरिए सामान बेचने वाली कंपनियों ने विशेष छूट और पेशकश के जरिए ग्राहकों को लुभाए रखा।

स्नैपडील के उपाध्यक्ष, मार्केटिंग, संदीप कुमारवेल्ली ने कहा कि देश में इंटरनेट का तेजी से बढ़ता दायरा एवं भुगतान के विकल्प बढ़ने से वर्ष 2012 में ई़-कामर्स उद्योग तेजी से फला-फूला।

उन्होंने कहा कि ग्राहकों ने इलेक्ट्रॉनिक सामान के अलावा फैशन एवं जूलरी, रसोई के सामान और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद में रुचि दिखाई, जिससे ई़-कामर्स कारोबार में तेजी देखने को मिली।

यद्यपि यात्रा पैकेज देने वाले इंटरनेट पोर्टल का अब भी ई़-कामर्स बाजार में दबदबा है, अन्य खंड भी जोर पकड़ रहे हैं।

होमशॉप18 डॉट कॉम के संस्थापक व सीईओ संदीप मल्होत्रा ने कहा कि परिधान, किताबें और जीवनशैली से जुड़ी वस्तुएं जैसे, सौंदर्य प्रसाधन, फुटवियर व स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद ई़-कामर्स में तेजी लाएंगी।

पेपरक्लोसेट डाट काम के मुताबिक 2015 तक इसके 38 अरब डॉलर पर पहुंचने की संभावना है। वर्ष 2012 में आमेजन जैसी कई बड़ी इंटरनेट कंपनियों ने भारतीय बाजार में दस्तक दीं। आमेजन ने जंगली डॉट कॉम नाम से अपना देसी संस्करण पेश किया।

इसके अलावा, भारत को इस साल 12 दिसंबर को साइबर मंडे का अपना संस्करण हासिल हुआ, जिसमें फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, होमशाप18 और मेकमाईट्रिप ने आनलाइन खरीदारों को छूट की पेशकश करने के लिए गूगल इंडिया के साथ साझीदारी की।

आईएमआरबी इंटरनेशनल और आईएएमएआई द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, देश में जून, 2012 तक अनुमानित 13.7 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता था, जिसमें से 9.9 करोड़ उपभोक्ता शहरी इलाकों से और शेष ग्रामीण इलाकों से रहे।

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