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पीड़िता को सिंगापुर भेजने का डॉक्टरों ने किया बचाव

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:29-12-2012 10:36:26 AMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
पीड़िता को सिंगापुर भेजने का डॉक्टरों ने किया बचाव

चलती बस में सामूहिक बलात्कार की शिकार लड़की को इलाज के लिए सिंगापुर भेजे जाने को लेकर उठते सवालों के बीच, सफदरजंग अस्पताल में उसका इलाज करने वाले दल के प्रमुख डॉक्टर तथा पीड़ित के साथ हवाई एंबुलेन्स में गए अन्य डॉक्टरों ने आज इस फैसले की आलोचनाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनका इरादा किसी भी सूरत में लड़की को बचाना था।
   
सफदरजंग अस्पताल के सुपरिन्टेन्डेंट डॉ बी डी अथानी ने कहा कि यह समय इस बात को लेकर बहस करने का नहीं है कि पीड़ित को सिंगापुर भेजने का फैसला राजनीतिक आधार पर था या चिकित्सकीय आधार पर।
   
उन्होंने कहा एकमात्र और सिर्फ एकमात्र इरादा हर सूरत में उसकी जान बचाने का था। पूरा देश उसके लिए प्रार्थना कर रहा था और हर व्यक्ति को उम्मीद थी कि वह ठीक हो जाएगी। हम उम्मीद नहीं त्याग सकते थे। हम उसकी जान बचाना चाहते थे।
   
मेदान्ता मेडिसिटी हॉस्पिटल के चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ यतीन मेहता ने कहा कि वह पीडिम्त को सिंगापुर भेजने के फैसले की आलोचना से आश्चर्यचकित हैं।
   
कुछ विशेषज्ञों जैसे गंगाराम अस्पताल के डॉ समीरन नन्दी ने आश्चर्य व्यक्त किया था कि गंभीर रूप से बीमार ऐसी मरीज को क्यों विदेश भेजा गया, जिसके रक्त और शरीर में संक्रमण था, तेज बुखार था और जो वेन्टीलेटर पर थी।
   
आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया में डॉ मेहता ने कहा अक्सर डॉक्टर दूसरे डॉक्टरों के फैसले की आलोचना करते हैं और यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि मरीज सिंगापुर के अस्पताल में 48 घंटे जीवित रही और यह नहीं कहा जा सकता कि उसे वहां नहीं भेजा जाना चाहिए था।
   
डॉ मेहता ने कहा दूसरी बात यह है कि भारत में सरकारी अस्पतालों और सिंगापुर के माउंट एलिजबेथ अस्पताल के बीच कोई तुलना नहीं है। मैं डॉक्टरों की कुशलता के बारे में नहीं बल्कि बुनियादी सुविधाओं के बारे में बात कर रहा हूं। हमें यह पता होना चाहिए।
   
डॉ अथानी ने कहा कि पीडिम्त की आंत और जननांगों में अत्यंत गंभीर चोटें थीं। उन्होंने कहा हमने उसकी आंत का बहुत बड़ा हिस्सा संक्रमण की वजह से निकाल दिया था। जो चोटें थीं वह अत्यंत गंभीर किस्म की थीं। हमने जननागों की चोट के बारे में बात नहीं की क्योंकि उससे तब उसके स्वास्थ्य पर असर नहीं पड़ रहा था।

 
 
 
 
 
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