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मेघालय में नया आकर्षण बने पेड़ों की जड़ वाले पुल

नोंगरियात (मेघालय), एजेंसी First Published:10-12-2012 01:45:41 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
मेघालय में नया आकर्षण बने पेड़ों की जड़ वाले पुल

दक्षिण मेघालय के नोंगरियात गांव में ग्रामीणों को नदियों-नालों को पार करने में मदद करने वाले पेड़ों की जड़ों से बने पैदल पुल राज्य में आकर्षण का नया केंद्र बन गए हैं।

पर्यटकों की ओर से इन पुलों को जीवित पैदलपुल नाम दिया गया है। इन पुलों को बनने में 12 से 15 वर्ष का समय लगता है। ये पुल बिना किसी सरकारी सहायता के अकेले ग्रामीणों के प्रयासों का नतीजा हैं।

इस तरह के पुल अधिकतर राज्य के दक्षिणी ढलान वाले इलाकों में देखने को मिलते हैं। इन पुलों की लंबाई 50 मीटर तक हो सकती है। इनकी मदद से ग्रामीण मानसून के दिनों में नदियों की तेज धाराओं को आसानी से पार कर लेते हैं।

पुल को देखकर यह बेहद आसान कार्य लग सकता है, लेकिन यह वास्तव में हुनर और अपार धैर्य का परिणाम होते हैं। पुल का निर्माण करने के लिए रबर पेड़ की उन जड़ों का इस्तेमाल किया जाता है जो कि पेड़ की मूल जड़ों से अतिरिक्त होती हैं तथा तनों से ऊपर बढ़ती हैं।

इन जड़ों को सावधानीपूर्वक नदियों के आरपार बिछाया जाता है। जड़ों को बिछाने के लिए सुपारी के पेड़ों के खोखले तनों का इस्तेमाल होता है। रबर पेड़ों की नरम जड़ें सुपारी के पेड़ के तनों के सहारे नदी के दूसरी ओर पहुंच जाती हैं। वहां पर इन जड़ों को मिट्टी में जड़ें जमाने दिया जाता है। इस तरह से पुल के प्राकृतिक ठोस आधार का निर्माण होता। समय बीतने के साथ ही जड़ें पैदल पुल का रूप ले लेती हैं।

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