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पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा में मतभेद

पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा में मतभेद

अनुसूचित जाति और जनजाति के सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण से जुड़ा विधेयक राज्यसभा में पारित होने के एक दिन बाद इस मुद्दे पर भाजपा सदस्यों के बीच मतभेद देखे गये।
   
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने पार्टी संसदीय दल की बैठक के बाद कहा कि  हां, यह सही है कि आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा हुई है और अलग अलग मत सामने आये हैं। लेकिन नेताओं ने बताया कि भाजपा के हस्तक्षेप के चलते ही पूरे संविधान संशोधन में व्यापक बदलाव किये गये हैं।
   
उन्होंने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेताओं ने सदस्यों को बताया कि अनुसूचित जाति़-जनजाति के कर्मचारियों को आरक्षण के तहत तरक्की देते हुए भी संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत (शासन में) कार्यकुशलता के नियमों की अनदेखी नहीं की जाएगी।
   
प्रसाद ने कहा कि जिन कर्मचारियों की पदोन्नति 1995 के बाद हुई है उनकी पदोन्नति को पदावनति में नहीं बदला जाएगा। सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस प्रावधान के लिहाज से केंद्र सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहेगा कि जिनकी पदोन्नति हो चुकी है, संशोधन के कारण उनके हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
   
तरक्की में आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का जहां भाजपा ने समर्थन किया है वहीं राजग में उसके सहयोगी दल शिवसेना ने इस पर विरोध जताया है। इसके अलावा सपा भी विधेयक के विरोध में रही है और कल उच्च सदन में मत विभाजन के दौरान अकेली पड़ गयी।

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