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पदोन्नति में आरक्षण का विरोध बढ़ा

पदोन्नति में आरक्षण का विरोध बढ़ा

पदोन्नति में आरक्षण का विरोध कर रहे उत्तर प्रदेश के 18 लाख कर्मचारियों की हड़ताल को राष्ट्रव्यापी बनाने की योजना रविवार को तैयार की जाएगी। इस मुद्दे पर राज्य में शनिवार को तीसरे दिन भी हड़ताल जारी रही।

विरोध प्रदर्शनों में सचिवालय के कर्मचारी भी शामिल हो गए हैं। इसके पहले पिछले दो दिनों से लखनऊ के लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, बिजली विभाग और अन्य प्रमुख कार्यालयों में कामकाज नहीं हो पा रहा था।

उत्तर प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों में विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इस बिल के कारण कर्मचारियों में भी आपसी मतभेद हैं। प्रदेश के लखनऊ, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, कानपुर आदि शहरों में तीसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन किए गए।

सर्वजन हिताय संरक्षण समिति के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि उत्तराखण्ड के कर्मचारी कल से हड़ताल पर चले गए जबकि राजस्थान के कर्मचारी कल से कार्य बहिष्कार करेंगे। उन्होंने कहा कि आन्दोलन को राष्ट्रव्यापी बनाने के लिए आज शाम यहां बैठक की जाएगी जिसमें दूसरे राज्यों के कर्मचारी नेताओं से भी सम्पर्क साधने पर निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि विधेयक जनविरोधी है अगर सरकार ने इसे वापस नहीं लिया तो आने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सफाया तय है। उन्होंने इस विधेयक को अव्यवहारिक और जनविरोधी बताया।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर सरकार ने इसे वापस न लिया तो आर-पार की लडाई होगी। इस बिल का समर्थन करने वाली आरक्षण बचाओ समिति का कहना है कि आंदोलनों से कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ा है। इस समिति से जुड़े लोगों ने शुक्रवार को चार घंटे अधिक काम किया।

दूसरी ओर पदोन्नति में आरक्षण का समर्थन कर रहे कर्मचारी नेता अवधेश वर्मा ने कहा कि उनके समर्थकों ने चार घंटे अतिरिक्त काम कर हड़ताल को निष्प्रभावी कर दिया है।

 

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