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लगा नाटकों का मेला

हिन्दुस्तान रीमिक्स First Published:04-01-2013 01:12:33 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
लगा नाटकों का मेला

भारत रंग महोत्सव यानी भारंगम का बेसब्री से इंतजार करने वाले कलाप्रेमियों का इंतजार आखिरकार आज पूरा हुआ। एनएसडी (राष्ट्रीय नाटय़ विद्यालय) के आज से शुरू हो रहे वार्षिक महोत्सव में थिएटर प्रेमी दुनियाभर के नाटकों का आनन्द ले सकेंगे।

राजधानी में सर्दी भले ही बढ़ गई है, लेकिन यहां की सांस्कृतिक दुनिया का तापमान बढ़ गया है। आज से नाटकों का अन्तरराष्ट्रीय महोत्सव 15वां भारत रंग महोत्सव यानी भारंगम शुरू हो रहा है। खासकर इस फेस्टिवल के आयोजन स्थल मंडी हाऊस क्षेत्र में इस फेस्टिवल की रंगत सिर चढ़कर बोलने लगी है। मंडी हाउस के तमाम ऑडिटोरियम रंगप्रेमियों की निगाहों में चमकने लगे हैं, जहां देश-विदेश के 87 लोकप्रिय नाटकों का मंचन होने वाला है।

आज शाम दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और जानेमाने फिल्मकार श्याम बेनेगल कमानी ऑडिटोरियम में इस फेस्टिवल का शुभारम्भ करेंगे, जिसके बाद प्रसिद्ध कलाकार कुलभूषण खरबंदा के नाटक ‘आत्मकथा’ के मंचन से फेस्टिवल में आए दुनियाभर के चुनिंदा नाटकों के मंचन का दौर शुरू हो जाएगा। शाम 5.30 बजे कोलकाता के ग्रुप पदातिक की प्रस्तुति महेश एलकुंचवार के नाटक ‘आत्मकथा’ का मंचन होने वाला है, जिसके निर्देशक विनय शर्मा हैं। इसके अलावा पहले दिन रंगप्रेमी एक और हिन्दी मिनिएचर मूमेंट्स ऑफ लाइफ का आनन्द ले सकते हैं। एनएसडी के इस डिप्लोमा प्रोडक्शन के निर्देशक हैं बिमल सुबेदी और इस नाटक का मंचन रात 8.30 बजे एनएसडी परिसर स्थित ऑडिटोरियम अभिमंच में होने वाला है।

विविधताओं से भरे भारतीय नाटक
फेस्टिवल में हिन्दी के दर्जनों नाटक तो हैं ही, आप विभिन्न भारतीय भाषाओं के नाटकों का लुत्फ उठा सकते हैं। अगर आप फैज के फैन हैं तो फेस्टिवल के दूसरे दिन पहले शो में ही श्रीराम सेंटर ऑडिटोरियम में फैज के जीवन पर आधारित सलिमा राजा निर्देशित नाटक चंद रोज और मेरी जान देख सकते हैं। विग्स कल्चरल सोसायटी की यह प्रस्तुति फैज और उनकी पत्नी एलिज फैज के बीच हुए पत्राचार पर आधारित है जो फैज के जेल में रहने के दौरान किए गए थे।

अगर आप चिट्ठियों की दुनिया से कट चुके हैं या उस दुनिया को देख ही नहीं पाए तो रबीन्द्रनाथ टैगोर के नाटक डाकघर को देखना आपके लिए अच्छा अनुभव बन सकता है। पी. एस. चारी निर्देशित इस नाटक में गांव में बीमार रहने वाला नन्हा बालक अमाल आपका मन अवश्य ही मोह लेगा। जब उसे मालूम होता है कि राजा उसके गांव में डाकघर खोल रहा है तो उसे उम्मीद बंध जाती है कि एक दिन राजा की चिट्ठी आएगी कि उसका डॉक्टर अमाल का इलाज करेगा। अगर आप सेलेब्रिटी के नाटकों के फैन हैं तो राकेश बेदी का नाटक मसाज भी आपको आकर्षित कर सकता है और नादिरा जहीर बब्बर का नाटक यार बन्ना बड्डी -बैंग ऑन..धमाल तिगड़ी भी देख सकते हैं। हरबंस सिंह निर्देशित मसाज विजय तेंदुलकर की रचना पर आधारित है। अनेक नाटक निर्देशकों के नाटकों से भरे इस फेस्टिवल में कई नाटक ऐसे भी हैं जिनमें आपको संवाद तो नहीं मिलेंगे लेकिन परंपरागत लोक कलाओं पर आधारित इन नाटकों में मजा भरपूर है।

विदेशी नाटकों की भी रहेगी धूम
लोकप्रिय नाटकों से सजे इस फेस्टिवल में हिन्दी समेत तमाम भारतीय भाषाओं के नाटक तो हैं ही, 18 विदेशी नाटक भी शामिल हैं। विदेशी नाटकों में बांग्लादेश की दो प्रस्तुतियां ब्रेख्त के मेजर्स टेकेन और सिकसस के ड्रम्स ऑन दि डैम, श्रीलंका की दो प्रस्तुतियां दि आईलैंड जेल और धावला भीषणा शामिल हैं। इस फेस्टिवल में फ्रांस का फुट्सबार्न थिएटर इंडियन टैम्पेस्ट प्रस्तुत करेगा जो शेक्सपीयर के टैम्पेस्ट पर आधारित है। इटली का टिएट्रो पोटलैच ग्रुप फेलिनीज ड्रीम ला रहा है। यह नाटक फेलिनी की फिल्मों के कुछ यादगार चरित्रों पर आधारित है। इनके अलावा चीन, ब्रिटेन, कोरिया आदि के नाटक भी आ रहे हैं। इतना ही नहीं, तीन देश अजरबैजान, ताईवान और हंगरी पहली बार इस फेस्टिवल में शामिल होने वाले हैं।

तरह-तरह की अन्य गतिविधियां
अगर आप नाटकों में गहरी रुचि लेते हैं तो फेस्टिवल में आपके लिए कई अन्य गतिविधियां भी शामिल हैं। आप अपने पसंदीदा नाटक के निर्देशक से मिलना चाहते हैं तो नाटय़ प्रस्तुति के अगले दिन निर्देशक से मुलाकात कार्यक्रम में उनसे रूबरू हो सकते हैं। दो तरह की प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें एक है ‘सेलीब्रेटिंग अ डिकेड 2002-2012’ और दूसरा लोकप्रिय थिएटर के साथ मीट दि डायरेक्टर्स फोरम है। फेस्टिवल में पांच व्याख्यान भी आयोजित किये जा रहे हैं।

समय पर लें टिकट
आपको जो नाटक पसंद हैं उन्हें देखने के लिए समय पर टिकट ले लें, ताकि बाद में किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। एनएसडी के जनसंपर्क अधिकारी ए. के. बरुआ के अनुसार, टिकट के लिहाज से तमाम नाटकों को तीन भागों में बांटा गया है। 5 से 10 जनवरी के बीच मंचित होने वालों नाटकों के टिकट मिलने शुरू हो चुके हैं। 11 से 15 जनवरी के बीच मंचित होने वाले नाटकों के टिकट 9 से बिकने शुरू होंगे और 16 व उससे आगे के नाटकों के टिकट आप 14 जनवरी से प्राप्त कर सकेंगे। टिकटों की कीमत 50, 100 और 200 रुपये रखी गई है। एनएसडी परिसर में स्थित काउंटर पर टिकट मिलने का समय प्रात: 10 से शाम 5 बजे के बीच है।

थोड़ी तैयारी कर लें
फेस्टिवल के तमाम नाटक मंडी हाउस के 8 ऑडिटोरियमों में मंचित किये जाएंगे। मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन यहां पहुंचने के लिए सबसे अच्छा विकल्प है।
शाम 4.30 से रात के लगभग 10 बजे तक मंचित होने वाले इन नाटकों का आनन्द उठाने के बाद भी आप लौटने के लिए भी मेट्रो की सेवा ले सकते हैं।

मंटो पर फोकस है यह फेस्टिवल
यह सआदत हसन मंटो का जन्म शताब्दी वर्ष होने के कारण उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए फेस्टिवल में उन पर और उनके काम पर आधारित छह नाटकों को शामिल किया है। इनमें दानिश हुसैन और महमूद फारुकी द्वारा मंटोइयत, केवल धालीवाल द्वारा इक सी मंटो, देवेंद्र राज अंकुर द्वारा खोल दो और मोजेल, एनएसडी रिपेटरी द्वारा दफा-292 और पाकिस्तान से सुनील शंकर और शाहिद नदीम तथा मदीहा गौहर द्वारा मंतोरामा और कौन है ये गुस्ताख की प्रस्तुतियां शामिल हैं।

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