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आईआईटी की फीस सालाना 40 हजार रुपए बढ़ी

आईआईटी की फीस सालाना 40 हजार रुपए बढ़ी

देश के सोलह आईआईटी में इस साल प्रवेश पाने वाले छात्रों को अब हर साल 90 हजार रुपए फीस देनी होगी, पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्रों के लिए फीस में कोई वृद्धि नहीं की गई है।

आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग के 25 प्रतिशत छात्रों को सौ प्रतिशत स्कॉलरशिप प्रदान की जाएगी बशर्ते उनके अभिभावक की सालाना आय साढ़े चार लाख रुपए से अधिक न हो। मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू ने बताया कि देश के सभी आईआईटी को सरकार 80 प्रतिशत फंड देती है और 20 प्रतिशत फंड छात्रों की फीस से आता है। अतः काकोदर समिति की सिफारिशों के अनुरुप आईआईटी को मजबूत बनाने के लिए फीस बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। ताकि वह आर्थिक रुप से स्वायत्त हो सके।

उन्होंने कहा कि अगर किसी छात्र का आईआईटी में दाखिला हो जाता है तो उसे पैसे की कमी के कारण पढ़ाई से वंचित नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आईआईटी के हर छात्र पर सरकार 2.50 लाख रुपए खर्च करती है। वर्ष 2008-09 में पच्चीस हजार से फीस बढ़ाकर 50 हजार रुपए किया गया था। अब पचास हजार रुपए से 90 हजार सालाना किया जा रहा है। हर साल फीस की समीक्षा की जाएगी पर यह जरूरी नहीं कि फीस में वृद्धि हो।

राजू ने बताया कि आईआईटी को 2020 तक विश्वस्तरीय बनाने के लिए शोध पर विशेष ध्यान दिया जाएगा तथा पीएचडी छात्रों की संख्या 3 हजार से बढ़ाकर दस हजार की जाएगी और विदेशी शिक्षकों को भी नियुक्त किया जाएगा एवं हर पांच साल पर आईआईटी के स्तर की समीक्षा की जाएगी। पहले यह समीक्षा आन्तरिक स्तर पर होगी, फिर बाहरी विशेषज्ञों द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी और इसके लिए एक समिति भी गठित की जाएगी, जिसमें विदेशों के भी विशेषज्ञ शामिल किए जा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि आन्तरिक समीक्षा के लिए समिति में सदस्यों का चयन दस लोगों के एक पैनल से किया जाएगा। निदेशक मंडल पैनल बनाएंगे और संबद्ध आईआईटी काउंसिल का अध्यक्ष सदस्यों का चयन करेगा। उन्होंने बताया कि आईआईटी तथा उद्योग जगत के बीच समन्वय स्थापित कर पीएचडी कार्यक्रम शुरु किया जाएगा जो उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरुप हो और उद्योग जगत इसका खर्च उठाएंगे।

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