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दिल्ली पुलिस ने शीला दीक्षित पर साधा निशाना

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:25-12-2012 09:43:32 PMLast Updated:26-12-2012 09:55:24 AM
दिल्ली पुलिस ने शीला दीक्षित पर साधा निशाना

दिल्ली पुलिस ने गैंगरेप पीड़िता के बयान दर्ज करने में वरिष्ठ अधिकारियों की दखलंदाजी का आरोप लगाने के कारण मंगलवार को एक तरह से प्रदेश की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर निशाना साधा है। इस बर्बर कांड के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान रविवार को घायल एक पुलिस कांस्टेबल की आज मौत हो गई।

दिल्ली पुलिस की यह कड़ी प्रतिक्रिया तब आई है जब मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को लिखे पत्र में पीड़िता के बयान रिकॉर्ड कराने में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर दखलंदाजी के आरोप लगाए और इस संबंध में उन्हें लिखे उपायुक्त (पूर्वी) बीएम मिश्रा के पत्र का हवाला दिया जिसमें उप मंडल आयुक्त उषा चतुर्वेदी ने पीड़िता का बयान दर्ज करने के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का हस्तक्षेप करने की शिकायत की थी।

इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने कहा कि पुलिस ने कभी भी एसडीएम को प्रश्नों की सूची से पूछने को विवश नहीं किया। एसडीएम ने शिकायत की थी कि पुलिस ने उन्हें उन प्रश्नों की सूची से पूछने को कहा जिसे उन्होंने (पुलिस) तैयार किया था।

कुमार ने कहा कि पुलिस ने ही जोर दिया था कि लड़की का बयान दर्ज किया जाए क्योंकि दिन प्रतिदिन उसकी हालत खराब होती जा रही है। चतुर्वेदी को मंडल आयुक्त का दायित्व सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि अगर एसडीएम को किसी भी समय पुलिस का दबाव महसूस हुआ तो वह बयान दर्ज करने से मना कर सकती थीं।

जैसे ही शीला दीक्षित ने गृह मंत्री से शिकायत की पुलिस ने तत्काल एक मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज कराने की मांग की जिसका कानूनी रूप से अधिक महत्व है। पीड़ित युवती के बयान दर्ज करने को लेकर उठे विवाद के बाद आज मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट ने उसका ताजा बयान दर्ज किया।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट ने लड़की का ताजा बयान दर्ज किया। पीड़िता के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रहे सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि पीड़िता की हालत कल के मुकाबले आज बेहतर है और उसकी महत्वपूर्ण जैविक क्रियाओं में पहले की तुलना में मामूली सुधार दिखायी पड़ा है, लेकिन वह अब भी जीवनरक्षक प्रणाली (वेंटीलेटर) पर है हालांकि उसकी स्थिति गंभीर है। उन्होंने कहा कि वह मानसिक रूप से स्थिर और सचेत है और अपनी बात व्यक्त कर पा रही है।

दूसरी ओर, दिल्ली के जंतर-मंतर में लोगों का एक छोटा समूह एकत्र हुआ और उसने राजधानी में युवती के साथ गैंगरेप की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग की। कड़ी पुलिस व्यवस्था के चलते शुरुआती दिनों में प्रदर्शन का केंद्र रहा इंडिया गेट आज भी प्रदर्शनकारियों की पहुंच से बाहर रहा। पुलिस ने इंडिया गेट और रायसीना हिल के केवल कुछ इलाकों को आवाजाही के लिए खोला।

इससे पहले, दिल्ली पुलिस को केन्द्रीय गृह मंत्रालय से राज्य सरकार के दायरे में लाए जाने की जोरदार मांग कर रही शीला दीक्षित ने शिंदे को लिखे एक पत्र में उपमंडलीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) की शिकायत की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है।

सूत्रों ने बताया कि एसडीएम उषा चतुर्वेदी ने दावा किया है कि जब वह पीड़िता का बयान दर्ज कर रही थीं तो तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पीड़िता के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग करने से रोका था। पुलिस अधिकारी चाहते थे कि उपमंडलीय मजिस्ट्रेट इसके लिए उस प्रश्नावली का उपयोग करें जो अधिकारियों ने तैयार की थी।

सूत्रों ने बताया कि पत्र के अनुसार जब उषा चतुर्वेदी ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ बदसलूकी की। पुलिस ने एसडीएम की ओर से लगाए गए इन सारे आरोपों से इनकार किया है। उसने गृहमंत्री को लिखे गए शीला के पत्र के लीकेज की उच्च स्तरीय जांच की भी मांग की।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने कहा कि हम एसडीएम उषा चतुर्वेदी की ओर से लगाए गए आरोपों से इनकार करते हैं। भगत ने कहा कि दिल्ली पुलिस मुख्यमंत्री की ओर से लिखे गए बेहद गोपनीय पत्र को मीडिया को लीक किए जाने की उच्च स्तरीय जांच की मांग करती है।

वहीं, पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने कहा कि पीड़िता और उसकी मां का बयान दर्ज किया गया। अगर एसडीएम को लगा कि कुछ गलत है तो उन्होंने बयान क्यों दर्ज किया। उन्होंने कहा कि बयान 21 दिसंबर को दर्ज किया गया, लेकिन इतने दिनों बाद 24 दिसंबर को क्यों शिकायत सामने आई और अगर शिकायत दर्ज की गई तो पुलिस के पक्ष को भी सुना जाना चाहिए था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी बातों से पुलिस का जांच कार्य प्रभावित होता है।

उन्होंने कहा कि इस बारे में बातें मीडिया में भी जाहिर कर दी गई। कुमार ने दावा किया कि इससे पहले भी पूर्वी दिल्ली में दंगे के दो मामलों में उन्हें चतुर्वेदी के साथ समस्या का सामना करना पड़ा था।

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