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दिल्ली में यमुना में पानी नहीं गंदगी है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली, एजेंसी First Published:04-12-2012 08:40:01 PMLast Updated:04-12-2012 10:09:26 PM
दिल्ली में यमुना में पानी नहीं गंदगी है: सुप्रीम कोर्ट

हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद यमुना सफाई परियोजना की विफलता पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस नदी में गंदे पानी के प्रवाह को रोकने के इरादे से आज समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पानी की निकासी का मार्ग परिवर्तित करने की संभावना तलाशने पर जोर दिया।

न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार और न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर की खंडपीठ ने इस नदी की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली में इसमें पानी नहीं बल्कि गंदगी बहती है। न्यायाधीशों ने हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद इस नदी की सफाई करने में विफल रहने के लिए सरकार को भी आड़े हाथ लिया।

न्यायाधीशों ने सवाल किया कि क्या हम पानी की निकासी को दिल्ली से 30-40 किलोमीटर दूर ले जा सकते हैं ताकि इसमें से ठोस अपशिष्ट अलग किया जा सके। इसे ऐसी बंद जगह पर ले जाना चाहिए जहां सरकार के पास इस परियोजना के लिए पर्याप्त भूमि हो। न्यायालय ने इस परियोजना में सहायता के लिए दिल्ली और रूड़की आईआईटी के निदेशकों को बुलाया है।

न्यायालय ने कहा कि यमुना नदी की सफाई पर 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक रकम खर्च हो चुकी है लेकिन विभिन्न सरकारी विभागों में तालमेल और सहयोग की कमी के कारण इसमें कोई सफलता नहीं मिल सकी है। न्यायालय ने कहा कि यह दुखद है कि इतनी राशि खर्च करने के बावजूद यमुना नदी साफ नहीं हो सकी। इस दौरान, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दिल्ली जल बोर्ड के वकील इस स्थिति के लिए परस्पर दोषारोपण करते रहे।

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