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मायावती ने की UP में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग

लखनऊ, एजेंसी First Published:07-01-2013 12:57:47 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
मायावती ने की UP में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग

बसपा प्रमुख मायावती ने प्रदेश की ध्वस्त कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के साथ-साथ सपा शासनकाल में लगातार हुए दंगों के मामले का राज्यपाल से तत्काल संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की राष्ट्रपति से संस्तुति किये जाने की मांग की है।

मायावती ने प्रदेश के संगठन की समीक्षा तथा लोकसभा चुनाव के समय से पूर्व होने की संभावनाओं के साथ साथ बदल रही राजनीतिक परिस्थितियों पर विचार करने के लिए बुलाई बैठक से पूर्व संवाददाताओं से बातचीत करते हुए प्रदेश की चौतरफा लचर व्यवस्था पर चिंता जताते हुए राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तुलना में यूपी में तेजी से बढ़ रहे अपराध, बलात्कार और भ्रष्टाचार ने प्रदेश की जनता को त्रस्त कर दिया है और राज्यपाल बी़एल़जोशी से मांग की कि वे अपने स्तर से इन मामलों को संविधान के परिप्रेक्ष्य में गंभीरता से लेते हुए खुद जानकारी हासिल करने के बाद राष्ट्रपति से तत्काल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करें।

मायावती ने कहा कि हालांकि वे खुद भी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलकर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर सकती हैं, लेकिन ऐसा करने पर उनपर और उनकी पार्टी पर राजनीति करने का आरोप लगा दिया जायेगा।

बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी की सरकार जब से सत्ता में आई है प्रदेश में हत्या, लूट, अपहरण और बलात्कार की घटनाएं तेजी से बढ़ती जा रही है और नौ महीने के शासनकाल में ही प्रदेश के कई भागों में दंगे हो चुके है, जिससे आम जन बुरी तरह त्रस्त है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी के गुंडे बदमाश आर्थिक भ्रष्टाचार कर रहे हैं, यह लोग वसूली जमीनों पर अवैध कब्जे करने में लगे हैं और सपा सरकार बसपा शासनकाल की निष्पक्ष जांच की आड़ में भी भ्रष्टाचार कर रही है।

मायावती ने कहा कि मौजूदा सरकार शासन व्यवस्था संभालने में पूरी तरह नाकाम रही है और लचर व्यवस्था से जनता का ध्यान हटाने के लिए ओबीसी को छात्रवत्ति देने की घोषणा कर रही है, जबकि ओबीसी की ही क्रीमीलेयर की सीमा घटाकर दो लाख रुपये कर दी गयी है, जबकि उन्होंने अपने शासन काल में इसे पांच लाख रुपये किया था।

दिल्ली के बलात्कार कांड का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसके बहाने विभिन्न संगठन और नेता तरह तरह की बयानबाजी कर मामले की गंभीरता को हल्का करने की कोशिश कर रहे हैं।

बलात्कार की बढ़ती घटनाओं और महिला उत्पीड़न को रोकने के लिए सख्त कानून बनाये जाने पर जोर देते हुए मायावती ने कहा कि फिल्म और विज्ञापन में बदलाव के साथ साथ समाज की कमियों को भी दूर करने की सख्त जरूरत है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा के 125 वर्ष पूरे होने पर यहां चल रहे समारोह में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर मायावती ने कहा, यह आयोजन सरकारी कम राजनैतिक ज्यादा है इसलिए मेरे जैसे लोगों का ऐसे कार्यक्रम में शामिल होना उचित नहीं।

एफडीआई के मामले में पूछे गये एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस नीति को राज्यों पर जबरन नहीं थोप रही है और स्पष्ट किया कि हमारी पार्टी उत्तर प्रदेश में एफडीआई को लागू नहीं होने देगी।

 
 
 
 
 
 
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