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ईश्वर को पाने के लिए ज्ञान और प्रेम जरूरी : पद्मविभूषण स्वामी रामभद्राचार्य

इलाहाबाद। निज संवाददाता First Published:02-12-2016 11:37:56 AMLast Updated:02-12-2016 11:40:28 AM

व्यक्ति संसार रूपी सागर को ज्ञान रूपी नाव से पार तो कर सकता है लेकिन उसमें प्रेम रूपी नाविक जरूर होना चाहिए। ज्ञान और प्रेम के माध्यम से ईश्वर को पाया जा सकता है। यह विचार पद्मविभूषण स्वामी रामभद्राचार्य जी ने रामबाग स्थित सेवा समिति परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्री रामकथा के अवसर पर व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि भगवान का भजन समस्त विधाओं का सार है। भगवान भजन करने वाले का अनर्थ नहीं होने देते। भजन से श्रद्वा पैदा होती है। मनुष्य संसार में रमा रहता है उसका कुछ भी नहीं होता। भगवान विचारों में आने लगे तो समझो ज्ञान आ गया और जब विचार आने लगे कि भगवान मेरे हैं सिर्फ मेरा समझना चाहिए।

कथा का शुभारंभ मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति गिरधर मालवीय, जीवन ज्योति अस्पताल के निदेशक डॉ. एक़े़ बंसल और वरिष्ठ भाजपा नेता विजय मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित करके किया। मुख्य यजमान डॉ. माणिक लाल श्रीवास्तव व उनकी धर्मपत्नी ने चरण पादुका पूजन किया।

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Web Title: Swami Rambhadracharya at Allahabad
 
 
 
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