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फैक्ट्री व आवास में जांच के लिए पहुंची टीम

नोटबंदी के बाद बैंकों की हालत खराब है। जिस तरह अचानक नोटबंदी हुई। उस अनुपात में बैंकों को छोटे नोट उपलब्ध नहीं कराए गए। मौजूदा हालात में बैंकों को जनता की मांग के अनुसार औसतन 10 प्रतिशत भी कैश नहीं दिया गया है। यही कारण है कि लोग बैंकों पर हंगामा कर रहे हैं।

बैंकों के मौजूदा हालात को देखकर कहा जा सकता है कि आरबीआई ने नोटबंदी से पहले इसकी तैयारी नहीं की थी। करेंसी को लेकर हो रही मारामारी का मुख्य कारण वैद्य करेंसी का पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध न होना है। सरकार द्वारा जो नए नियम बनाए गए हैं उसके पालन करते हुए आज शहर के बैंक को हर रोज औसतन 50 लाख रुपये की वैद्य करेंसी की आवश्यकता है। जिस हिसाब से बैंकों में भीड़ उमड़ रही है, उस हिसाब से देहातों की भी हर बैंक को शुरुआती दौर में कम से कम दस लाख रुपये रोजाना की खपत चाहिए। बैंक प्रबंधकों की मानें तो उन्हें अब तक औसतन दस प्रतिशत भी करेंसी उपलब्ध नहीं कराई गई है। जब तक एक बार बड़ी मात्रा में कैश नहीं आएगा तब तक करेंसी की किल्लत से जूझ पाना बेहद मुश्किल है।

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  • Web Title:Banks can not find ten percent cash demand