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इस छूट के मायने

इस छूट के मायने 
सरकार ने आयकर संशोधन विधेयक को लोकसभा से बिना चर्चा किए पास करा लिया, और मनी बिल होने के कारण राज्यसभा में कोई समस्या नहीं होगी। मगर इस प्रावधान का औचित्य समझ में नहीं आया कि खुद काला धन की घोषणा करने के बाद 50 प्रतिशत सरकार का और 50 प्रतिशत आपका क्यों? क्या यह देश में छिपे सारे काले धन को बाहर निकालने की योजना है या काला धन रखनेवालों को फिर से एक और सहूलियत? क्या गरीब कल्याण कोष के बहाने काला धन रखनेवालों को एक नया मौका नहीं दिया गया है? महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि गरीब कल्याण योजना के नाम से बने इस कोष का किन क्षेत्रों में प्रयोग होगा? क्या पुरानी योजनाओं की जगह कुछ नवीन योजनाएं लाई जाएंगी या फिर पुरानी योजनाओं में ही जान फूंकने की कोशिश होगी? इन सभी सवालों के जवाब के लिए हमें फरवरी तक इंतजार करना होगा। अब तो आम बजट में ही पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।
वीरेश्वर तोमर, हरिद्वार, उत्तराखंड

राष्ट्रगान पर फैसला 
सर्वोच्च न्यायालय ने फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान को अनिवार्य घोषित कर दिया है। इससे लोगों में देशभक्ति की भावना जागृत होगी। मगर इसके साथ-साथ सभी शिक्षण संस्थानों, कॉलेजों, स्कूलों में भी सुबह के समय राष्ट्रगान अनिवार्य कर देना चाहिए। इसके साथ ही, सरकारी कार्यालयों में भी ऐसा ही किया जाना चाहिए। जब सभी अधिकारी और कर्मचारी एक साथ राष्ट्रगान करेंगे, तो देशभक्ति और एकता देखते ही बनेगी।
विजय कुमार धानिया, डीयू

जवानों की सुरक्षा
कश्मीर के हालात को देखते हुए यह जरूरी है कि हमारी सरकार सैनिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए। जवानों को उच्च गुणवत्ता के नए हथियार, बंदूकें, बुलेट प्रूफ जैकेट और विभिन्न प्रकार की तकनीकी सामग्री नियमित तौर पर दी जानी चाहिए। इससे देश के सैनिकों की मुश्किलें तो कम होंगी ही, निर्दोषों को निशाना बनाने वाले आतंकियों को मारने में भी उन्हें आसानी होगी।
ओम सिंह

काले धन का बंटवारा
देश में जारी आर्थिक उथल-पुथल को हम सब देख रहे हैं। लोग कतारों में हैं, फिर भी सरकारी पहल को सराह रहे हैं। यहां तक कि दिन-प्रतिदिन आ रहे नए नियमों के बाद भी लोग इसका समर्थन कर रहे हैं। मगर अब काला धन को सफेद करने की छूट देना क्या उन लोगों का मजाक नहीं है, जिनके अपनों ने नोट बदलवाने में जान गंवाई, अपनों को खो दिया या दर-दर की ठोकरें खाईं? बेईमानी की पिच पर काले धन का बंटवारा क्यों?
एम के मिश्रा, रातू, रांची

कैशलेस की नौटंकी 
मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले को शायद ही कोई गलत कह रहा है। मगर किसी भी फैसले को अमल में लाने के लिए जो जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए थे, वे क्या इस मामले में उठाए गए? फिलहाल ऐसा दिखता नहीं है। नोटबंदी को 22 दिन से अधिक हो चुके हैं, मगर अब भी पर्याप्त नकदी की आपूर्ति नहीं हो पाई है। निस्संदेह कैशलेस इकोनॉमी किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद है- पारदर्शिता के लिहाज से और काला धन को खत्म करने के लिए भी। मगर सवाल यह है कि क्या हमारी अर्थव्यवस्था अभी इसके लिए तैयार है? क्या देश के सभी लोग डिजिटल रूप से साक्षर हैं? क्या सभी के पास बैंक खाते हैं? और इन सबसे भी जरूरी बात कि हमारे पास साइबर-क्राइम से निपटने के पर्याप्त इंतजाम हैं? ऐसा लगता है कि वर्तमान सरकार ने दिल्ली, नोएडा, मुंबई, चंडीगढ़ और बेंगलुरु जैसे शहरों को ही असली भारत समझ लिया है। अभी इन्हें भारत और इंडिया के बीच का अंतर समझना होगा और इसके बीच की विषमता को दूर करना होगा, तभी कुछ बात बन सकती है।
कन्हैया पांडेय
रघुनाथपुर, बिहार

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  • Web Title:sense of relaxation