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असली मुद्दा गायब

First Published:21-04-2017 03:34:30 PMLast Updated:21-04-2017 03:34:30 PM

यह दुख और दुर्भाग्य की बात है कि दिल्ली निगम चुनाव में तेजी से बढ़ते जाम, सरकारी भूमि के अतिक्रमण, अवैध पार्किंग, ध्वनि व वायु प्रदूषण और सड़कों पर आवारा पशुओं के डेरे आदि जैसे असली मुद्दे प्राय: सभी पार्टियों के घोषणापत्र व प्रोग्राम से गायब हैं। इन मामलों में कुछ ठोस करने की कोई योजना ही नहीं है उनके पास। ऐसे में, दिल्ली सांस लेने लायक और पेरिस कैसे बन सकती है, जिसका वादा ये पार्टियां जोर-शोर से कर रही हैं? दिल्ली को ऐसे ही बदहाल रखने के लिए अवैध कॉलोनियों की वोट पर लार टपकाती पार्टियां बिना किसी सुधार के ही इन्हें वैध या पक्की करने पर तुली हैं। ये कॉलोनियां पहले ही अनेक कारणों से नरक बनी हुई हैं। इन प्रमुख समस्याओं को हल किए बिना दिल्ली में कोई भी सुधार संभव नहीं है।
वेद मामूरपुर, नरेला

हादसे-दर-हादसे
अभी इस खबर की तफसील को हम जान भी नहीं पाए थे कि हिमाचल में हुई बस दुर्घटना में जिन 40 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, उनके लिए कौन जिम्मेदार है और मृतकों के शव उनके परिजनों तक पहुंचे भी या नहीं कि तभी नोएडा के सेक्टर- 11 से एक कंपनी में छह लोगों के जिंदा जलने की खबर सामने आ गई। ये दोनों घटनाएं मानवीय भूल की वजह से हुई हैं और इनकी बहुत बड़ी कीमत उन परिवारों को चुकानी पड़ी, जिनके अपने इसका शिकार हुए हैं। क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि हमारे देश की व्यवस्था इतनी मुकम्मल होगी कि कोई बस यूं ही दर्जनों परिवारों की खुशियां न निगल पाए? दरअसल, इन घटनाओं के लिए पूरी तरह से प्रशासन जिम्मेदार है, जो अपने कर्तव्य के निर्वाह को लेकर लापरवाही बरतती आई है। सरकार से अब यही गुजारिश है कि वह कोई दलील न दे, बस प्रशासनिक तंत्र को चुस्त-दुरुस्त करे।
कात्यायनी राय, न्यू पुनाईचक, पटना-23

बयान पर बवाल
मशहूर पार्श्व गायक सोनू निगम हाल ही में दिए गए अपने ‘अजान’ संबंधी बयान को लेकर विवाद में आ गए हैं। वैसे तो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में आप निर्भीक होकर अपना मत रख सकते हैं और यही इसकी विशेषता भी है, मगर जरूरत है उसे सही नजरिये से देखने की! गौर से देखने पर पता चलता है कि बात बहुत साधारण सी थी- सुबह-सुबह अजान की वजह से नींद खुलने पर एक व्यक्ति की चिड़चिड़ेपन की अभिव्यक्ति! वैसे भी सुबह की नींद बहुत गहरी होती है और किसी कारणवश यह टूट जाए, तो दिन भर मस्तिष्क को बहुत सारी नकारात्मक ऊर्जा से लड़ना पड़ता है। फिर चाहे वह आवाज मस्जिद से आ रही हो या मंदिर से! इसलिए हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, सब हैं आपस में भाई-भाई की मजबूती को थामे रखने की जरूरत है। अपने नजरिये को लचीला बनाकर आपसी सद्भाव कायम रखने की आवश्यकता है।
आभा कुमारी, सेक्टर-16, रोहिणी

लाल बत्ती का मोह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत का हर एक नागरिक वीआईपी है। यह वाकई अच्छी बात है, जिसके लिए मोदी जी की तारीफ की जानी चाहिए। लेकिन इसका बोध होने में प्रधानमंत्री को इतना वक्त क्यों लगा? वह भी तब, जब अरविंद केजरीवाल वीआईपी कल्चर के खिलाफ काफी कुछ बोल चुके हैं और पंजाब के नए कांग्रेसी मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने लाल बत्ती पर रोक लगा रखी है। दरअसल, इस देश में लोक-लुभावन घोषणाएं तो हमने बहुत पढ़ी-सुनीं, मगर उन पर अमल होते नहीं देखा। याद कीजिए, इसी केंद्र सरकार के सत्ता में आते वक्त कितने मंत्रियों ने सरकारी मुलाजिमों की हाजिरी चेक की थी। क्या अब भी वे फेरे लगा रहे हैं? दरअसल, हर अच्छी घोषणा अपनी कामयाबी के लिए अमल चाहती है। प्रधानमंत्री जी ऐसा कराएं, तभी बात बनेगी। वरना लाल बत्ती का मोह, नीली बत्ती या पीली बत्ती का चेहरा ले लेगी।
अरुण सिंह सहरावत, गुरु रामदास नगर, दिल्ली- 92

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