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यूपी के सोनभद्र में कस्तूरबा विद्यालयों की दशा खराब, नोटिस के बाद भी नहीं सुधरे

सोनभद्र। प्रमुख संवाददाता First Published:23-09-2016 02:44:00 PMLast Updated:23-09-2016 02:48:12 PM

नगवां ब्लाक के नदंना गांव में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं में पांच सितंबर की रात को डायरिया फैलने के बाद जिले के सभी आठ कस्तूरबा विद्यालयों के हालात की पड़ताल हुई थी। पड़ताल में हालात बेहद खराब मिले। यहां न तो शुद्ध पेयजल की व्यवस्था ही मिली और न ही साफ-सफाई की। रसोई से लेकर छात्र-छात्राओं के हॉस्टल सहित पूरा विद्यालय परिसर बेहद गंदा और बदहाल मिला था। आठ सितंबर को डीएम ने इन विद्यालयों के रख-रखाव के लिए जिम्मेदार बीएसए, विद्यालय कोआर्डिनेटर और एनजीओ को नोटिस जारी कर 15 दिन में सभी में आरओ प्लांट लगाने सहित साफ-सफाई और खान-पान सहित अन्य में अमूल चूल परिवर्तन का निर्देश दिया था। डीएम के आदेश के 15 दिन बीतने के बाद भी इन विद्यालयों की दशा में कोई विशेष सुधार नजर नहीं आया। हिन्दुस्तान ने नोटिस अवधि बीत जाने के बाद नंगवा ब्लाक के नदंनी गांव, बभनी ब्लाक के बभनी, राबर्ट्सगंज ब्लाक के उरमौरा और घोरावल ब्लाक के घोरावल में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की पड़ताल शुक्रवार को की। सभी विद्यालयों में रंग-रोगन का काम होता तो मिला। लेकिन, पेजयल की मूल समस्या का निदान किसी भी विद्यालय में नहीं मिला। कहीं भी आरओ प्लांट नहीं लगाया गया है। नदंना को छोड़ कर कहीं भी भोजना की व्यवस्था भी सही नहीं मिली। हास्टल में बिस्तर और चौकियां पहले की ही तरह बदहाल मिले। जिलाधिकारी सीबी सिंह के अनुसार कस्तूरबा विद्यालय से जुड़े जिम्मेदार लोगों की जल्दी बैठक बुलाउंगा। उनसे जवाब-तलब किया जाएगा कि अब तक सुधार क्यों नहीं हुआ। अपने स्तर से भी मैं इसकी पड़ताल करवाऊंगा।

15 दिन में इन कामों को पूरा करने का था निर्देश

सोनभद्र। जिलाधिकारी सीबी सिंह की ओर से बीएसए, विद्यालय कोआर्डिनेटर और एनजीओ को आठ सितंबर को जारी नोटिस में जो सुधार के निर्देश दिए गए थे। उसमें शुद्ध पेयजल प्रमुख था। क्योंकि, नदंना में दूषित पानी पीने से ही दो दर्जन छात्राएं बीमार पड़ी थी। इसके अलावा अन्य सुधार के निम्न निर्देश थे--

1- विद्यालय परिसर में उगी झाड़ियों को काटा जाए, पूरा परिसर साफ किया जाए

2- विद्यालय भवन सहित पूरे परिसर में रंग-रोगन कर नया रूप दिया जाए

3- विद्यालय की दीवारों पर वाल राइटिंग कर विद्यार्थियों को दी जाने वाली सरकारी सुविधाओं को बताया जाए

4- रसोई घर में सातों दिन का दिनवार मेन्यू एक बोर्ड के जरिए दर्शाया जाए

5-हॉस्टल में खराब बिस्तर और चौकियों को अविलंब बदला जाए, विद्यार्थियों को मच्छरदानी दी जाए

6-सभी को स्कूल डे्रस और बैग दिए जाएं

7- विद्यालय की मुख्य दीवार पर डीएम, सीडीओ, बीएसए और एसडीएम के नंबर लिखे जाएं, ताकि अव्यस्थाओं को लेकर कोई भी सीधे शिकायत कर सके

नदंना में नहीं लगा आरओ

वैनी। नगवां ब्लाक के नदंना में स्थित कस्तूरबा विद्यालय में पांच सितंबर की रात को दूषित पेयजल के कारण एक-एक कर के दो दर्जन छात्राएं डायरिया से पीड़ित हो गईं थीं। उसके बाद विद्यालय में छुट्टी कर दी गई। यहां पर आरओ प्लांट न होने की जानकारी के बाद डीएम ने आरओ प्लांट लगाने का निर्देश दिया था। शुक्रवार को यहां की पड़ताल में आरओ प्लांट नजर नहीं आया। कक्ष का फर्श और खिड़की टूटी मिली। बिस्तर पहले की ही तरह गंदा दिखा। परिसर की सफाई भी नजर नहीं आई। बदलाव के नाम पर रंग-रोगन होता मिला। किचन में अब गैस से खाना बन रहा। आज भी एक एनजीओ की ओर से छात्राओं को बैग दिया गया।

उरमौरा में पसिर में मिली गंदगी

सोनभद्र। राबर्ट्सगंज तहसील के उरमौरा स्थित कस्तूरबा विद्यालय के हालात में भी विशेष सुधार नहीं दिखे। परिसर में गंदगी दिखी। गंदा पानी जमा हुआ मिला। कहीं भी वाल राइटिंग नहीं मिली। हास्टल की दशा में विशेष सुधार नहीं दिखा। पूरे परिसर में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई नजर आई, जिससे यहां रहने वाली छात्राओं को हमेशा विषैले जंतुओं का भय सताता है। छात्राओं ने बताया कि भोजन व्यवस्था में विशेष सुधार नहीं हुआ है। नये बिस्तर आदि भी नहीं मिले हैं। शुद्ध पेयजल का अभाव है। यहां मौजूद शिक्षिका ने बताया कि विद्यालय परिसर का धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। कुछ दिनों में सब सुधर जाएगा।

बैग फटे हैं, भरपेट नाश्ता नहीं मिलता

बभनी। यहां के विद्यालय की छात्राओं को खेलने का सामान अब तक नहीं मिला। जो बैग है, वह फट चुका है। उसे बदला नहीं गया है। दो साल पहले जूते मिले थे, वह जगह-जगह से फटे हैं। उससे काम चलाया जा रहा है। हास्टल में पहनने के लिए चप्पल नहीं दी गई है। घर से ही छात्राएं लाती हैं। पहले से एक बैंक की ओर से लगाया आरओ काफी छोटा है। पर्याप्त नहीं है। नया आरओ नहीं लगा है। कहीं वाल राइटिंग नहीं है। भरपेट नाश्ता नहीं मिलता। शौचालय सहित परिसर में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। हां, यहां अब रसोई गैस पर खाना बनने लगा है। रसोईघर की सफाई की स्थिति कुछ सुधरी है।

चौकी टूटी, खिड़की में शीशे नहीं

घोरावल। स्थानीय तहसील क्षेत्र के खरुआंव गांव में स्थित कस्तूरबा विद्यालय के हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। यहां आरओ तो लगा है। लेकिन, पानी की टंकी से जुड़ा न होने के कारण बेकार पड़ा है। छात्राओं को नहाने के लिए शौचालय के नल से बाल्टी में पानी भर कर लाना पड़ता है। पूरे परिसर में जल जमाव है। एक ओर की दीवार टूटन से छात्राएं असुरक्षित महसूस करती हैं। हास्टल में टूटी चौकी है। यहां के खिड़की शीशे टूट चुके हैं। कभी दूध नहीं मिलता। रंग-रोगन का काम यहां नहीं हो रहा। हां, सुधार के नाम पर अब रसोईघर में गैस चूल्हा आ गया है। पर, मेन्यू के अनुसार नाश्ता और खाना नहीं मिलता।

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