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वंश-वृद्धि और संतान के लिए महिलाओं ने की जिउतिया पूजा

पटना। प्रधान संवाददाता First Published:23-09-2016 07:43:00 PMLast Updated:23-09-2016 11:05:17 PM

राजधानी सहित पूरे प्रदेश में शुक्रवार को महिलाओं ने वंश वृद्धि व संतान की लंबी आयु के लिए 24 घंटे का व्रत रखा और जीमूतवाहन की पूजा की। व्रत का पारण शनिवार की सुबह 7 बजे के बाद केराव (मटर) ग्रहण कर होगा। आश्विन कृष्ण अष्टमी को बिहार सहित पूर्वी उत्तर प्रदेश में जिउतिया पूजा होती है।

गोबर-मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा

व्रती महिलाएं शुक्रवार को पूरे दिन अन्न-जल ग्रहण किए बिना रहीं। देर शाम में कुश के जीमूतवाहन व मिट्टी-गोबर से सियारिन व चूल्होरिन की प्रतिमा बनाकर जिउतिया की पूजा की। भगवान को फल-फूल, पुआ, हलवा, ठेकुआ, पिरुकिया के नैवेद्य चढ़ाए गए। पूजन के बाद पंडित से जीमूतवाहन की कथा सुनी गयी। व्रती महिलाओं ने जागरण भी किया। शनिवार की सुबह 7.15 बजे के बाद इस महाव्रत का पारण होगा। इसके बाद प्रसाद बांटा जाएगा। ज्योतिषी पीके युग के अनुसार जिउतिया पर ग्रह-गोचरों का खास संयोग रहा। सूर्य और बृहस्पति के कन्या राशि में रहने से राजलक्षण योग में महिलाओं ने जिउतिया की पूजा की।

चूल्होरिन ने भी पूरी निष्ठा से की थी जिउतिया पूजा

शास्त्रों के अनुसार जीमूतवाहन की कथा सबसे पहले भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाई थी। यह कथा एक चूल्होरिन व सियारिन की है। दोनों ने आश्विन कृष्ण अष्टमी को जिउतिया व्रत रखा। सियारिन को भूख बर्दाश्त नहीं हुई और उसने मांस खा लिया। चूल्होरिन ने पूरी निष्ठा से पूजा की। अगले जन्म में दोनों ने एक ब्राह्मण की बेटी के रूप में जन्म लिया। चूल्होरिन (अब शीलावती) की शादी मंत्री से और सियारिन (अब कर्पूरावती) की राजा मलयकेतु से हुई। दोनों को सात-सात पुत्र हुए पर सियारिन के सातों पुत्रों की मौत हो गई और चूल्होरिन के जीवित रहे। सियारिन ने नाराज होकर पति से चूल्होरिन के बेटे के सिर काटकर लाने को कहा। राजा मलय ने ऐसा ही किया पर जीमूतवाहन की कृपा से सातों पुत्र जीवित हो गए।

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Web Title: women worship Jiutia for son
 
 
 
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