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भक्ति और शक्ति को मिलाया था गुरु गोविंद सिंह ने

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो First Published:23-09-2016 06:25:00 PMLast Updated:23-09-2016 10:20:46 PM

समागम के पहले सत्र में ‘गुरु गोविंद सिंह जी एक आध्यत्मिक उद्धारक और अधिकारों के रक्षक विषय पर चर्चा हुई। सत्र की अध्यक्षता कर रहे पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के कुलपति जसपाल सिंह ने कहा कि लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए गुरु गोविंद सिंह ने बड़ी कीमत चुकाई थी। पिता, माता और अपने चार पुत्रों को खो दिया। पर, तनिक भी नहीं डिगे। उस समय लोग यह मान चुके थे कि अन्याय और अत्याचर को सहन करना ही उनके भाग्य में लिखा है। लोगों में घोर निराशा थी। ऐसे समय में सिर हथेली पर रखकर गुरु गोविंद सिंह ने अत्याचारी शासकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने बताया कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा था कि ‘धन्य है वह देश जहां गुरु गोविंद सिंह जैसे संत और वीर जन्म लिए।

प्रो. जसपाल ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह प्रेम और भाईचारा का संदेश देते थे। कहते थे कि लोगों को गले लगाए बिना किसी को रब की प्राप्ति नहीं हो सकती। अंतरराष्ट्रीय सिख समागम के बेहतर आयोजन के लिए प्रो. जसपाल ने बिहार सरकार को धन्यवाद दिया।

वाणियों का विभिन्न भाषाओं में हो अनुवाद : राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष त्रिलोचन सिंह ने कहा कि समागम में गुरु गोविंद सिंह की कुछ वाणियों का चयन कर उनका विभिन्न भाषाओं में अनुवाद कराया जाए। फिर देश और विदेश में उनकी वाणी पहुंचाई जाए। तभी सिख समागम का आयोजन का मकसद पूरा होगा। मौके पर डॉ. परमवीर सिंह, नारक सिंह, सुखदयाल सिंह, गुरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, हरवंश कौर, गुरजीत सिंह, उपेंद्र सिंह, हबीब, समशेर सिंह, केएस गिल, सुखवीर सिंह आदि ने भी विचार रखे।

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Web Title: guru govind had mixed devotion and strength
 
 
 
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