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सिखों का मूल सिद्धांत मानवता की सेवा, सिख सम्मेलन का दूसरा दिन

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो First Published:23-09-2016 08:54:00 PMLast Updated:23-09-2016 11:36:28 PM

सिख एक विचार है। इसका मूल सिद्धांत मानवता की सेवा है। केवल माथा टेकना ही इस धर्म का अर्थ नहीं है। जो कोई भी अगर गुरु शब्द को अपना ले, वह सिख है। अंतरराष्ट्रीय सिख समागम के दूसरे दिन तीसरे सत्र में सिखिज्म-ए फेथ ऑफ लव एंड ह्यूमिनिटी विषय पर देश-विदेश से आए वक्ताओं ने यह विचार रखा।

सामान्य प्रशासन विभाग में पदस्थापित विभागीय जांच आयुक्त डॉ. अमिता पाल ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने शानदार काम किया है। चंडीगढ़ के डॉ. जसबीर सिंह ने कहा कि सिख समुदाय का आधार ही मानवता की सेवा है। इसकी बुनियादी उसूल लोगों की रक्षा करना है। सिख धर्म ही विश्व का धर्म है। इतिहास गवाह है कि सबसे अधिक शहादत सिखों ने ही दी है। चंडीगढ़ से आए सेवानिवृत्त प्रोफेसर कुलवंत सिंह ने कहा कि सिख धर्म के रीति-रिवाज औरों से अलग है। इस धर्म के दृष्टिकोण को पूरे विश्व ने माना है। इस धर्म की विशेषता के कारण ही सिख धर्म यूनिवर्सल आदर का पात्र बना हुआ है।

ऑस्ट्रेलिया से आए सुरिन्दरजीत सिंह ने कहा कि जहां सरकार की कोशिशें नाकाफी होने लगती हैं, सरदार उसे पूरा करता है। कई स्थानों पर आए कृत्रिम व प्राकृतिक आपदा आने पर सिख समुदाय बढ़-चढ़कर सेवा करता है। चंडीगढ़ से ही आए सरदार गुरप्रीत सिंह ने कहा कि मानवता की सेवा के अलावा इस धर्म व समुदाय के लिए कोई धर्म नहीं है, लेकिन इस धर्म में भी जात-पात घर करने लगा है। इसे दूर करने के लिए हमें गुरु गोविंद सिंह जी के बताए रास्तों को अपनाना चाहिए।

बिहार धर्मों की भूमि : गुलबर्ग सिंह बैंस ने कहा कि इस धर्म के मानने वाले लोगों के लिए सेवा ही सर्वस्व है। परिचर्चा का संयोजन करते हुए डॉ. गुरमीत सिंह ने कहा कि बिहार धर्मों की भूमि है। सिख, बुद्ध, जैन व हिन्दू धर्म की यहां बहुलता है। सूफी संतों का यहां जन्म हुआ। सिख धर्म के तीन गुरु बिहार में रहे। गुरु गोविन्द सिंहजी महाराज का जन्म यहां हुआ और उनका बाल्यकाल यहां बीता। सिख धर्म के मानने वाले लोग देश-दुनिया में कहीं भी हों, उनके लिए दूसरों की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है।

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Web Title: The basic principle of the Sikhs to serve humanity
 
 
 
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