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निलंबन से शर्मसार हुआ भारत
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:19-12-12 05:25 PM
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इस साल का आगाज जहां कामयाबी के जश्न के साथ हुआ तो अंत शर्मिंदगी में डूबकर। लंदन ओलंपिक में सबसे ज्यादा पदक जीतने के बाद भारतीय ओलंपिक संघ को चुनाव में ओलंपिक चार्टर का पालन नहीं करने पर आईओसी ने निलंबित कर दिया।

भारतीय ओलंपिक संघ में सत्ता की लड़ाई के कारण हुई इस कार्रवाई ने देश को शर्मसार किया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में खिलाड़ियों की तिरंगे तले भागीदारी पर भी सवालिया निशान लग गया है। आईओए को अब आईओसी से अनुदान भी नहीं मिलेगा और ना ही उसके अधिकारी ओलंपिक बैठकों में भाग ले सकेंगे।

आईओसी का कहना है कि भारत ओलंपिक चार्टर का पालन करने में नाकाम रहा और एक दागी अधिकारी को शीर्ष पद के लिए चुनाव लड़ने की अनुमति दी जिसकी वजह से निलंबन की कार्रवाई करनी पड़ी। आईओए ने सरकार की खेल आचार संहिता के तहत चुनाव कराके इस सजा को खुद दावत दी थी। इसके बाद से आईओए और सरकार के बीच आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया।
 
आईओसी में भारत के प्रतिनिधि रणधीर सिंह को इसके लिए दोषी ठहराते हुए आईओए के मौजूदा अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने कहा कि उन्होंने आईओए, आईओसी और सरकार को गुमराह किया। आईओसी में देश के प्रतिनिधि होने के नाते उन्हें आईओए का बचाव करना चाहिए था। रणधीर आईओए अध्यक्ष पद की दौड में थे लेकिन ऐन मौके पर उन्होंने नाम वापिस ले लिया।

आईओए के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष वीके मलहोत्रा ने सरकार पर खेल आचार संहिता थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार दोषी है। हम चाहते हैं कि सरकार, आईओसी और आईओए मिलकर इस समस्या का हल निकालें। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद हमारे पास खेल आचार संहिता के तहत चुनाव कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।

खेल मंत्रालय ने तुरंत आईओए पर दोष मंढ़ते हुए कहा कि सरकार की खेल आचार संहिता और ओलंपिक चार्टर में कोई फर्क नहीं है और यदि आईओए अपने संविधान में संशोधन कर लेता तो निलंबन से बचा जा सकता था। इस निलंबन के एक दिन बाद आईओए ने चुनाव कराये जिसमें चौटाला निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए जबकि दागी ललित भनोत को महासचिव चुना गया।

आईओसी ने साफ तौर पर कहा कि ओलंपिक चार्टर की शर्तों को पूरा नहीं करने तक आईओए निलंबित ही रहेगा। अजय माकन की जगह खेलमंत्री बने जितेंद्र प्रसाद ने कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है लेकिन वह आईओसी अधिकारियों से मिलकर समस्या का हल निकालने की कोशिश करेंगे। सरकार ने आईओसी को एक तदर्थ समिति के गठन का सुक्षाव दिया है जिसमें मशहूर खिलाड़ियों को शामिल किया जाए।
 
निलंबन के बाद सरकार ने भारतीय तीरंदाजी संघ और भारतीय अमैच्योर मुक्केबाजी महासंघ की मान्यता रद्द कर दी। सरकार ने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ को भी नोटिस देकर दो महीने के भीतर संविधान में बदलाव करके नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया है।

 
 
 
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