पुलिसकर्मियों को छुडा़ने में पूरा समर्थन दे रहा है केन्द्र दिल्ली में डेंगू के प्रकोप पर आजाद ने की बैठक पीओके में चीन: भारत ने कराया अपनी चिंता से अवगत मारे गए बंधक पुलिसकर्मी की शिनाख्त ल्यूकास के रूप में पुलिसकर्मियों में ल्यूकास का शव मिला, इंस्पेक्टर का पता नहीं भ्रष्टाचार मामले में केतन देसाई के खिलाप पेशी वारंट जारी लंदन में पीटने से हुई थी भारतीय दुकानदार की मौत आर्थिक संकट से जूझ रहा है तालिबान: अमेरिकी जनरल दुबई में 13,000 लोगों ने अपनाया इस्लाम धर्म औरंगजेब की लिखी कुरान की प्रति होगी नीलाम
भारत ने अपनी क्षेत्रीय बादशाहत बरकरार रखते हुए मंगलवार को बंगबंधु नेशनल स्टेडियम में रंगारंग समारोह के बीच समाप्त हुए 11वें दक्षिण एशियाई खेलों में 90 स्वर्ण पदक सहित 175 पदक हासिल किए। बांग्लादेश के राष्ट्रपति जिया उर रहमान और सेनाध्यक्ष जनरल एम अब्दुल मुबिन ने रंगारंग समारोह में 12 दिन चले खेलों के समापन की घोषणा की।
भारत ने लगातार 11वीं बार अपना दबदबा बनाए रखा तथा 90 स्वर्ण, 55 रजत और 30 कांस्य पदक जीते। खेलों में कुल 158 स्वर्ण पदक दांव पर लगे थे। पाकिस्तान 19 स्वर्ण, 25 रजत और 36 कांस्य लेकर दूसरे जबकि मेजबान बांग्लादेश 18 स्वर्ण, 23 रजत और 56 कांस्य पदक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। रंगारंग समापन समारोह में 12 हजार बच्चों ने भाग लिया।
बांग्लादेश ओलंपिक संघ के भी अध्यक्ष जनरल मुबिन ने भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी को ध्वज और मशाल सौंपी। इस अवसर पर आईओए महासचिव रणधीर सिंह भी उपस्थित थे। भारत 12वें सैग खेलों की मेजबानी करेगा।
उद्घाटन समारोह में आठ देशों अफगानिस्तान, नेपाल, पाकिस्तान, भारत, भूटान, मालदीव और बांग्लादेश के खिलाड़ियों ने मार्च पास्ट किया था लेकिन समापन समारोह में बहुत कम खिलाड़ी उपस्थित थे। असल में मार्च पास्ट फ्लाप शो रहा तथा अफगानिस्तान का कोई भी खिलाड़ी इसमें शामिल नहीं हुआ।
नेपाल के केवल 11 सदस्यों ने इसमें भाग लिया जबकि पाकिस्तान के भी अधिकतर खिलाड़ी अनुपस्थित थे। भारत ने इन खेलों में 331 खिलाड़ी उतारे थे लेकिन मार्च पास्ट में केवल 12 ही पहुंचे। हालांकि मार्च पास्ट के बाद काफी भारतीय खिलाड़ी इन खिलाड़ियों से जुड़ गए थे।
सैग के शुभंकर कुटुम्ब (रोबिन पक्षी) ने सभी को अलविदा कहा। बांग्लादेशी सेना और अद्धसैनिक बलों बैंड बजाते हुए स्टेडियम में पहुंचे जिसके बाद दक्षिण एशियाई खेलों का ध्वज झुका दिया गया और खेलों के शुरू से जल रहा अग्निकुंड बुझा दिया गया जिसके साथ ही खेलों का औपचारिक समापन भी हो गया।

ई-मेल

लिखे (0)









