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विंध्याचल में शारदीय नवरात्र की तैयारी बनी चुनौती

विंध्याचल (मिर्जापुर)। हिन्दुस्तान संवाद First Published:23-09-2016 01:26:00 PMLast Updated:23-09-2016 01:28:12 PM

मां विंध्यवासिनी के धाम में एक अक्तूबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र मेला को महज सात दिन बचे हैं। इतने कम समय में तैयारियों को पूरा करना किसी चुनौती से कम नहीं है। नगर पालिका प्रशासन, पीडब्लूडी और बिजली विभाग की ओर से तैयारियों को धीमी गति से चलाया जा रहा है। इससे देश और विदेश से मां विंध्यवासिनी के दर्शन पूजन के लिए आने वाले भक्तों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

कोतवाली रोड, चामुंडा गली, पुराना दीवान घाट, सुगंधी देवी गली, लाला गली, बहादुर गली, न्यू वीआईपी, खत्री धर्मशाला, पक्का घाट, कचौड़ी गली सहित मंदिर जाने वाली सभी गलियों में चलना आसान नहीं रह गया है। घाट की ओर जाने वाले मार्गों पर भी नाली का गंदा पानी गलियों में बह रहा है। गंगा घाट पर भी भक्तों को स्नान करने में इस बार दिक्कत होगी। क्योकि गंगा में आयी बाढ़ का शील्ट सीढ़ियों और उसके नीचे तक जमा हो गया है। उसकी सफाई आसानी से नहीं हो पा रही है। विंध्य पंडा समाज के साथ ही अन्य तीर्थपुरोहितों की ओर से डीएम कंचन वर्मा का ध्यान आकृष्ट कराया जा चुका है। बावजूद अभी तक ठोस पहल नहीं हुई है। पंडा समाज के अध्यक्ष राजन पाठक ने पत्रक सौंपकर मंदिर की व्यवस्था को बहाल करने की मांग की है। कहा है कि घाटों की सफाई, बिजली की व्यवस्था के साथ ही गलियों की सफाई आवश्यक है। जिससे दर्शनार्थियों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

त्रिकोण मार्ग पर शाम होते ही छा जा रहा घुप अंधेरा

मिर्जापुर। मां विंध्यवासिनी, अष्टभुजा और कालीखोह का त्रिकोण दुनिया में एकलौता है। यहां नवरात्र में दर्शन पूजन करने के साथ ही भक्ता साधना के लिए भी आते हैं। त्रिकोण मार्ग की परिक्रमा करने वालों की संख्या भी कम नहीं होती है। बावजूद अभी तक त्रिकोण मार्ग पर प्रकाश की व्यवस्था नहीं हो पायी है। त्रिकोण मार्ग पर अष्टभुजा मंदिर के उपर पहाड़ से गेरुआ तालाब और मोतिया झील तक मार्ग पर लगी स्ट्रीट लाइटें खराब हो गई हैं। इससे पूरे इलाके में शाम से ही अंधेरा छा जाता है और शरारतीतत्वों की सक्रियता बढ़ जाती है। ऐसे में दर्शनार्थियों के साथ दुर्घटना का भी खतरा बना रहेगा।

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Web Title: The challenge in preparing Vindhyachal Shardiy Navratri
 
 
 
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