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पहचान बनाए है नेपाली कोठी की रामलीला

लखनऊ। निज संवाददाता First Published:23-09-2016 06:36:00 PMLast Updated:23-09-2016 06:39:23 PM

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की लीला को नाट्य शैली में प्रस्तुत करने वाली चौक की बच्चों की रामलीला 48 वर्ष बाद भी अपनी पहचान बनाए हुए है। आकाश मार्ग से पवनपुत्र के उतरने का दृश्य तथा विशाल भरत मिलाप शोभा यात्रा देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

रामलीला समिति इस बार साज-सज्जा के साथ एक अक्टूबर से 14 अक्तूबर तक नेपाली कोठी बागटोला चौक में प्रारम्भ करने जा रही है। इस रामलीला की विशेष खासियत यह है कि यहां अधिकांश किरदार बच्चे ही निभाते हैं। इस बार करीब 22 बच्चे लीला में विभिन्न किरदारों में दिखेंगे। राम, लक्ष्मण, सीता, भरत, शत्रुघ्न ,हनुमान, वानरी व राक्षसी सेना में आठ से 12 वर्ष के बच्चें ही नजर आएंगे।

इतिहास --श्री शिशु बाल रामलीला समिमि के प्रदीप टण्डन ने बताया कि रामलीला की शुरुआत 1968 में मुकुंद लाल चबूतरे से हुई थी। बच्चों के माध्यम से शुरू की गई रामलीला में कमला देवी कपूर ने निर्देशन देकर एक दिशा दी। उसके बाद 1976 में प्रमोद टण्डन के प्रयास से यह रामलीला नेपाली कोठी में होने लगी। बाद में, अनिल कपूर के निर्देशन में और मोतीलाल के संगीत निर्देशन में इस रामलीला ने व्यव्थ्तित रूप लिया।

श्री रामचारितमानस और राधेश्याम रामायण पर आधारित इस लीला में बच्चों को प्रमुखता दी जाती है। उन्होंने बताया कि इस बार कम समय में अच्छी लीला हो ऐसा प्रयास किया जा रहा है। मंच पर फिल्मी नृत्यों पर सख्त रोक है। सिर्फ भजन व नृत्य ही होंगे।

खलती है थापा की कमी

कन्हौया लाला थापा एक ऐसा नाम जो लखनऊ की कई रामलीलाओं में भजनों पर नृत्य कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। कुछ वर्ष पूर्व उनका निधन हो गया। उनके निधन से कई रामलीलाओं में उनकी कमी खलती है। नेपाली कोठी, चौक की पब्लिक रामलीला और डालीगंज की मौसमगंज रामलीला में करीब 50 वर्षो तक थापा जी ने धार्मिक नाटकों रामलीला व भजनों पर नृत्य कर लोगों का मनमोह लेते थे। नेपाली कोठी के पप्पी कहते है कि रामलीला में उनकी कमी खलती है। उनका परिवारिक लगाव था। उन्हें लीला से आस्था और लगावा था इसी लिए वह यहां आते थे।

10 को आकाश मार्ग से आएगी संजीवनी

रामलीला में पिछले कई वर्षो से लक्ष्मण शक्ति के दिन लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए हनुमान आकाश मार्ग से संजीवनी बूटी लाते हैं। इस बार भी 10 अक्तूबर को यह प्रसंग देखने को मिलेगा। करीब 35 फीट लम्बे लोहे के तार से हनुमान जी संजीवनी बूटी को लेने जाएंगे और बाद में बूटी को लेकर आएंगे। यह दृश्य देखने के लिए लोगों में होड़ सी लगी रहती है। लीला देखने के लिए इस दिन लीला स्थल के चारों ओर तथा छतों पर देखने के लिए तांता लगा रहता है।

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Web Title: रामलीला
 
 
 
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