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ब्लॉग वार्ता: यदुकुल गौरव मॉडल और जाति की एकता

पूनम यादव अनंता पत्रिका की संपादक हैं। बखूबी काम कर रही हैं। आकांक्षा यादव को काव्य कुमुद का सम्मान मिला है। मुंबई में आतंकियों के विरुद्ध जिल्लू यादव की बहादुरी। ऐसे तमाम कामयाब यादवों के बार में बताने का काम करता है ब्लॉग यदुकुल। क्िलक कीािए द्धह्लह्लश्चज् 4ड्डस्र्ह्वद्मह्वद्य. ड्ढद्यoद्दह्यश्चoह्ल.ष्oद्व तमाम तरह के यादव यहां मिलेंगे। ब्लॉग पर जाति पत्रिकाओं को देख थोड़ी सी हैरानी हुई। हमारे समाज में ऐसे बहुत लोग हैं, जो अपनी जाति के इतिहास और स्वाभिमान को बताने के लिए बेचैन रहते हैं। जाति की विशिष्टता और श्रेष्ठता साबित करने का यह चलन बीसवीं सदी के शुरू होते ही हो गया था। जब पहली बार जाति के आधार पर जनगणना हुई और सत्ता सुविधा में अपनी हिस्सेदारी पर दावा के लिए जाति संगठन बनने लगे। इन संगठनों के जरिये इसके नेता अपनी हैसियत बढ़ाते और श्रेष्ठ साबित करने के लिए जाति का पौराणिक इतिहास भी गढ़ने लगते। सुमित सरकार लिखते हैं कि 100 में ही कायस्थों ने अखिल भारतीय समिति बना ली थी और इलाहाबाद से एक अखबार कायस्थ समाचार निकालने लगे थे। यदुकुल ब्लॉग इसी का एक विस्तार है। आजमगढ़ के राम शिवमूर्ति यादव का यह ब्लॉग है। यदुवंशी एकता चौधरी बनीं मिस इंडिया यूनिवर्स। इस लेख पर खास नजर पड़ती है। लिखते हैं कि यदुवंशियों के लिए खुशी की बात है कि इस वर्ष पेन्टालून्स फेमिना मिस इंडिया में मिस इंडिया यूनिवर्स चुनी गई एकता चौधरी यदुवंशी हैं। इससे पहले बालीवुड की दुनिया में रघुवीर यादव के अलावा किसी यादव ने खास नाम रौशन नहीं किया। कुछ यादव प्रोड्यूसर और एक्टर के भी नाम दिये गए हैं। मॉडलिंग में अपनी जाति का कोई पहुंचे अब यह गर्व की बात है। जातियां बहुत चालाक होती हैं। आधुनिक समाज की हर कुलीन चीज को पहले गाली देती हैं और फिर वहां अपनी जाति के किसी बंदे को देख गर्व भी महसूस करती हैं। सभी जातियों में ऐसा होता है। शिवमूर्ति यादव लिखते हैं कि संभवत: यह पहला मौका है, जब ग्लैमर की दुनिया में यदुवंश का कोई इस मुकाम तक पहुंचा है। वे आगे लिखते हैं कि एकता चौधरी मिस यूनिवर्स का ताज जीत कर भारत और यदुवंशियों का नाम रौशन कर। मॉडलिंग से किसी जाति का नाम रौशन हो सकता है, यह अभी-अभी शुरू हुआ है। सारी मिस इंडियाओं ने अपनी जाति का नाम भी रोशन किया है, इसका अंदाजा फेमिना और पेन्टालून्स कंपनियों को भी नहीं होगा। इस ब्लॉग को पढ़कर एक बात और समझ में आई। जातियां कभी भी अपने को राष्ट्र से ऊपर नहीं मानतीं। उनकी दूसरी जातियों से प्रतियोगिता रहती हैं लेकिन राष्ट्रवाद से किसी जाति की कोई प्रतियोगिता नहीं रहती। इस ब्लॉग पर एशिया की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर सुरखा यादव का भी जिक्र है। सुरखा को यादव बताने के लिए उसके मूल टाइटल भोंेसले को ब्रैकेट में लिखा गया है। सुरखा(भोंसले) यादव। सुरेखा भोंसले महाराष्ट्र की हैं। कई यादव साहित्यकारों की उपलब्धियों का जिक्र है। मशहूर साहित्यकार राजेन्द्र यादव का जिक्र नजर नहीं आया। शायद ब्लॉगर राजेन्द्र यादव को यदुकुल सिरमौर बताने का साहस नहीं जुटा सके हैं। इसके अलावा एक आईएएस अफसर अजय सिंह यादव की किताब का जिक्र है। मैंने आईएएस क्यों छोड़ी। ब्लॉगर ने इस किताब की समीक्षा की है। मंडई पत्रिका के संपादक कालीचरण यादव की तारीफ की जाती है। छत्तीसगढ़ के कालीचरण यादव 300 पेज की इस पत्रिका का अकेले संपादन करते हैं। पत्रिका निशुल्क वितरित होती है। एक और पत्रिका यादव साम्राज्य का जिक्र है। इसमें यादव समाज के रावाड़ों और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े यादवों के बार में विस्तार से दिया गया है। जाति पत्रिकाएं बदल रही हैं। यदुकुल ब्लॉग में बाबा साहब अंबेडकर का भी जिक्र है। पश्चिम दिल्ली से बीएसपी के उम्मीदवार दीपक भारद्वाज की मेज पर ब्राह्मण एकता परिषद की एक पत्रिका दिखी थी। उसके भीतर अंबेडकर के विचारों पर लेख छपा देखा। हो सकता है कि दीपक भारद्वाज के बीएसपी में शामिल होने के बाद इस लेख को छापा गया हो। लेकिन अंबेडकर का छपना साफ करता है कि पत्रिकाओं और जातिगत संगठनों का इस्तेमाल राजनीतिक महत्व प्राप्त करने के लिए ही होता है। मुझे इस ब्लॉग के पहले लेख की पहली पंक्ित काफी रोचक लगी। शीर्षक है- आज यदुकुल ब्लॉग का प्रारंभ। तारीख है 10 नवंबर 2008। हमार देश की हाारों जातियां जब अपनी पत्रिकाओं के साथ इंटरनेट पर आ जाएंगी, इनके जरिये जातिगत समाज का अध्ययन घर बैठे किया जा सकेगा। बस पत्रिकाओं के कंटेंट में कोई खास बदलाव नहीं है, डेढ़ सौ साल से कमोबेश एक जसा ही है। जातियां इंटरनेट पर पसर रही हैं। rड्ड1न्ह्यद्ध ञ्चठ्ठस्र्ह्ल1.ष्oद्व लेखक का ब्लॉग है ठ्ठड्डन्ह्यड्डस्र्ड्डद्म. ड्ढद्यoद्दह्यश्चoह्ल.ष्oद्व
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