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जंतर-मंतर पर शिक्षामित्रों का प्रदर्शन जारी, प्रधानमंत्री का करेंगे घेराव

shiksha mitra

गुरुवार को भी हजारों की संख्या में शिक्षामित्रों ने जंतर मंतर पर अपना प्रदर्शन जारी रखा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से उप्र सरकार की ओर से समस्या का हल न मिलने के बाद हजारों की संख्या में शिक्षा मित्र दिल्ली आए थे। 

केंद्र सरकार से उम्मीद लगाकर आए शिक्षामित्र कोई आश्वासन न मिलने से आक्रोशित थे। प्रदर्शन के चौथे दिन शिक्षामित्रों द्वारा किसी उग्र प्रदर्शन की आशंका से पुलिस ने जंतर मंतर को छावनी में तब्दील कर दिया था। देर शाम तक धरना दे रहे सैकड़ों लोगों को शिक्षा मित्र संगठन के नेताओं ने घर जाने को कहा। 

जंतर मंतर पर तीन दिनों से गर्मी, धूप और खुले में रात बिता रहे ये हजारों शिक्षामित्र केंद्र सरकार के ठंडे रवैये से नाराज दिख रहे थे। हर किसी में मीडिया और नेताओं को लेकर गुस्सा साफ दिख रहा था। दोपहर के बाद से रात तक हालात यह थे कि तकरीबन आधा किलोमीटर के दायरे में चारों तरफ शिक्षामित्र ही नजर आ रहे थे। इतने दिनों तक धरने में बैठी महिला शिक्षामित्रों का धैर्य जवाब दे रहा था। उनमें से कई फूट-फूटकर रो रही थीं तो कुछ गश खाकर गिर रही थीं। वहीं खुद को बेरोजगार महसूस कर रहे शिक्षामित्र भी बेहद उदास थे। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को हमारे लिए कुछ सकारात्मक सोचना चाहिए था। प्रधानमंत्री ने हमारा साथ देने का वादा किया था जो पूरा नहीं किया।

आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जितेन्द्र शाही ने बताया कि शिक्षामित्रों का एक प्रतिनिधिमंडल मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेड़कर से मिलने गया। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अवलोकन कराऊंगा। सर्व शिक्षा अभियान के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे तभी कोई निर्णय ले पाऊंगा। जब राज्य सरकार प्रस्ताव भेजेगी तभी विचार करेंगे। शाही ने कहा कि हम अभी इस धरने को स्थगित करेंगे, लेकिन यह आंदोलन लगातार जारी रहेगा। 

जंतर मंतर पर देर शाम तक धरना दे रहे लोगों का जमावड़ा रहा जिससे पुलिस-प्रशासन के सभी वरिष्ठ अधिकारी भी वहीं रहे।

पूरा मामला

शिक्षामित्रों का समायोजन 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द कर दिया गया है। वहीं उन्हें टीईटी पास करने के बाद ही भर्ती में मौका देने की बात भी फैसले में है। लेकिन शिक्षामित्र लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि केन्द्र सरकार कानून में संशोधन कर उन्हें समायोजित कर सकती है। वहीं वे शिक्षक बनने तक समान कार्य और समान वेतन की मांग पर अड़े हैं। शिक्षामित्रों का समायोजन अखिलेश सरकार में हुआ था। उनका वेतन 39 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गया था, लेकिन समायोजन रद्द होने के बाद वे फिर से पुराने 35 सौ रुपये के मानदेय पर आ गए जिसे योगी सरकार ने 10 हजार रुपये कर दिया जो शिक्षामित्रों को मान्य नहीं है।

जंतर मंतर का हाल-बेहाल


तीन दिनों से तकरीबन 50 हजार की संख्या में जंतर मंतर व आसपास कूड़े और पानी की खाली बोतलों, पन्नियों का अंबार लग गया है। पुलिस की चौकसी और इतनी बड़ी भीड़ के चलते जंतर मंतर के चारों तरफ यातायात भी प्रभावित रहा। गुरुवार को जनपथ के चारों तरफ से ट्रैफिक को पूरी तरह बंद करने से जाम की स्थिति बन गई। 

पुलिस ने वाटर केनन से आंदोलनकारी शिक्षामित्रों को रोका 


जंतर मंतर से संसद भवन का घेराव करने निकले हजारों की संख्या में शिक्षामित्रों पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल करके रास्ते में ही रोक दिया। यहां शिक्षामित्र संगठनों के नेताओं के साथ बड़ी संख्या में आंदोलनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। पुलिस ने इस मौके पर जंतर मंतर को चारों तरफ से घेरा था। बैरीकेडिंग की तरफ बढ़ रहे आंदोलनकारियों को पुलिस ने पहले रोकने की कोशिश की, प्रदर्शनकारियों के न रुकने पर पुलिस ने उन्हें वाटर केनन के जरिये रोक दिया। 

प्रधानमंत्री का घेराव करेंगे

यूपी शिक्षा मित्र संगठन के अध्यक्ष जितेंद्र शाही ने कहा कि आने वाली 22 सितंबर को प्रधानमंत्री अपने संसदीय क्षेत्र में जा रहे हैं। यहां हजारों की संख्या में शिक्षामित्र उनका घेराव करेंगे। उन्होंने यहीं एक रैली में कहा था कि वह शिक्षामित्रों का दर्द समझते हैं। हम उन्हें उनका यह वादा याद दिलाएंगे।
 

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  • Web Title:shikshamitra protest at jantar mantar continues
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