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कंपनी के निदेशक आरटीआई एक्ट के तहत नहीं हैं आम नागरिक

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत किसी कंपनी के निदेशक या प्रबंधक आम नागरिक नहीं हैं। आयोग ने यह अहम फैसला देते हुए कहा है कि ‘ऐसे में किसी कंपनी के निदेशक या प्रबंधक सूचना के अधिकार कानून का इस्तेमाल नहीं कर सकते। आयोग ने कहा है कि आरटीआई केवल आम नागरिक और कर्मचारियों के लिए है। केंद्रीय सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने शेर सिंह रावत की ओर से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज करते हुए यह फैसला दिया। सूचना के अधिकार कानून की धारा 3 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा है कि ‘सूचना पाने का अधिकार सिर्फ आम नागरिक को है और इस संदर्भ में किसी कंपनी के निदेशक या प्रबंधक को आम नागरिक की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है। आयोग ने कहा है कि याचिकाकर्ता शेर सिंह रावत एक कंपनी के निदेशक हैं। वह आम नागरिक की हैसियत से आरटीआई दाखिल कर सूचना मांग रहे हैं। आयोग ने कहा है कि इस मामले में अपीलकर्ता साधारण व्यक्ति, नागरिक या एक व्यक्ति नहीं है बल्कि उनका अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ स्वार्थ निहित है। हाईकोर्ट ने सीआईसी को नोटिस जारी किया हाईकोर्ट तय करेगा कि किसी कंपनी का निदेशक आरटीआई कानून के तहत आम नागरिक है या नहीं। इस बारे में हाईकोर्ट ने सीआईसी को नोटिस जारी किया है। जस्टिस संजीव सचदेवा ने यह आदेश शेर सिंह रावत की ओर से आयोग के फैसले के खिलाफ अधिवक्ता सुशील सहगल द्वारा दाखिल अपील पर दिया है। उन्होंने आयोग एवं अन्य संबंधित पक्षों से छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 25 अक्तूबर को होगी। हालांकि, हाईकोर्ट ने पहली नजर में यह माना है कि आयोग ने कानून के दायरे से बाहर जाकर यह फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि आयोग का काम यह तय करना है कि आवेदक ने जो सूचना मांगी है वह मुहैया कराई जा सकती है नहीं। हाईकोर्ट ने कहा है शेर सिंह रावत ने निजी हैसियत में या फिर हो सकता है अपनी कंपनी के लिए आरटीआई के तहत जानकारी मांगी हो लेकिन महज इस आधार पर जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कंपनी का अपने कर्मचारियों से विवाद है। निदेशक ने यह जानकारी मांगी थी निजी कंपनी में बतौर निदेशक शेर सिंह रावत ने ईपीएफओ से पीएफ कानून की धारा 7सी के तहत अपनी कंपनी के खिलाफ चल रही कार्यवाही से जुड़ी जानकारी मांगी थी। कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कर्मचारियों के भविष्य निधि मद के पैसे में अनियमितता का आरोप है। भविष्य निधि संगठन द्वारा जानकारी देने से इनकार किए जाने के बाद रावत ने सीआईसी में अपील दाखिल की थी। ईपीएफओ को कार्रवाई पूरी करने की छूट हाईकोर्ट ने ईपीएफओ के आयुक्त को इस मामले में संबंधित कंपनी और अधिकारी के खिलाफ पीएफ एक्ट की धारा 7सी के तहत कार्यवाही पूरी करने व निर्णय लेने की छूट दे दी। हाईकोर्ट ने आयुक्त से कहा, वह इस मामले में केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा पारित फैसले से प्रभावित हुए बगैर कानून के तहत उचित निर्णय लें। साथ ही कहा है कि हाईकोर्ट में लंबित शेर सिंह रावत की याचिका भी इस मामले में निर्णय लेने में बाधक नहीं होगी।
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  • Web Title:The company's directors are not citizen under the RTI Act.
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