class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सिख दंगा मामले में एसआईटी प्रमुख 13 सितंबर को पेश हों

1984 सिख विरोधी दंगा मामले में अदालत ने विशेष जांच समिति (एसआईटी) प्रमुख को तलब किया है। साथ ही जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत ने कहा कि एसआईटी का गठन मामलों की दोबारा जांच करने के लिए किया गया था, लेकिन एसआईटी ने कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं किया। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अजय सिंह शेखावत की अदालत ने एसआईटी प्रमुख को जवाब दाखिल करने के लिए 13 सितंबर को पेश होने का आदेश दिया है। यह आदेश उस मामले में किया गया है, जिसमें एसआईटी ने जांच के बाद मामला बंद करने की सिफारिश अदालत से की है। एसआईटी की क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी जांच में कोई ऐसा साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे दंगा मामले के किसी आरोपी का नाम सामने आया हो। अभियोजन पक्ष के अनुसार 3 नवंबर 1984 को आनन्द पर्वत इलाके में 300-400 लोगों की भीड़ ने एक 50 वर्षीय सिख अजायब सिंह को पत्थर बरसाकर मार डाला था।ए थे। पुलिस ने हवा में फायर कर लोगों को तितर-बितर किया था। मामला पटेल नगर थाने में दर्ज किया गया था। हालांकि आरोपियों की शिनाख्त नहीं हो पाई थी। जनवरी 1985 में अदालत ने आरोपियों की पहचान न हो पाने वाली पुलिस रिपोर्ट स्वीकार कर ली थी। 84 दंगा मामले में सरकार ने फरवरी 2015 में मामलों की पुन: जांच के लिए एसआईटी गठित की। एसआईटी प्रमुख के तौर आईपीएस अधिकारी अनुराग एवं सदस्य सेवानिवृत जज राकेश कपूर व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ग्यानेश को शामिल किया गया था। मामले में एसआईटी ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट पेश करते हुए कहा है कि अजायब सिंह के परिवार से बात की गई है। उन्होंने घटना में शामिल लोगों के बारे में कोई जानकारी होने से इंकार किया है।
  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:sikhriots
दुष्कर्म का विरोध करने पर युवती को चौथी मंजिल से फेंकायमुनापार में अलग-अलग स्थानों पर तीन ने की खुदकुशी