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मांझा पर प्रतिबंध होने के बावजूद बढ़ रही है घायल पक्षियों की संख्या

नई दिल्ली। कार्यालय संवाददाता। पंद्रह अगस्त नजदीक आते ही एक तरफ जहां समूचे देश में आजादी का जश्न होता है। वहीं दूसरी तरफ मांझा से पक्षीयों के घायल होने की घटनाएं सामने आने लगती हैं। यही कारण है कि इस बार चांदनी चौक स्थित पतंग की दुकानों से चाइनिज मांझा गायब है।चाइनीज मांझा से आए दिन पक्षी घायल हो रहे हैं। कांच व कैमिकल युक्त मांझा काफी धारदार होता है। जिसमें अधिकतर पक्षी फंस जाते हैं और घायल हो जाते हैं। चांदनी चौक स्थित चैरिटबल बर्ड हॉस्पिटल के सचिव सुनील जैन ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल घायल पक्षियों की संख्या काफी है। क्योंकि पिछले साल 15-17 अगस्त के बीच 500 पक्षी घायल हुए थे। 2015 में भी पक्षियों के घायल होने की संख्या लगभग 470 थी। जबकि इस साल 15 अगस्त से पहले ही 200 के करीब पक्षी घायल हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में एकाध पक्षी घायल हो जाते थें। क्योंकि उस वक्त पतंगबाजी के दौरान चाइनीज मांझा का चलन नहीं था। नायलोन के साथ-साथ कांच की मौजूदगी मांझे को और धारदार बनाता है।दस से बीस फीसदी बढ़ी घायल जंगली पक्षियों की संख्यासउद और नदीम दोनों भाइयों ने 2003 में घायल जंगली पक्षियों की सेवा करने की शुरुआत की। छोटे भाई नदीम ने बताया कि साल दर साल मांझा से जंगली पक्षियों के घायल होने की संख्या में 10 से 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। जिसमें सबसे ज्यादा चीलों की संख्या है। इसके बाद उल्लू काफी घायल होते हैं। हालांकि उल्लू सबसे ज्यादा घायल पेड़ो पर लटके मांझो के वजह से होता है। साल 2010 में 700-800 पक्षियों के मामले आते थें। लेकिन इस साल 2000 से 2500 की संख्या में घायल पक्षी आए हुए हैं। वहीं बड़े भाई नदीम ने बताया कि मांझा किसी भी तरह का हो पक्षी घायल हो ही जाते हैं। कभी-कभी कुछ मांझे इतने खतरनाक होते हैं कि पक्षियों के हडडी तक कट जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि घायल जंगली पक्षियों को अस्पताल तक लाने में दिल्ली पुलिस व फायर ब्रिगेड भी अहम भूमिका निभाती है। मांझा से बढ़ती घटनाओं को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया की देश के सभी बाजारों से चाइनीज मांझा पर रोक लगाई जाए।चाइनीज मांझा चांदनी चौक से गायब15 अगस्त जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे ही बाजार में बच्चों द्वारा मांझा की मांग बढ़ती जा रही है। लेकिन इस बार दिल्ली के चांदनी चौक इलाके से चाइनीज मांझा नदारद है। इलाके की सभी दुकानदारों ने एक खास तरह का नोटिस लगाया है। जिसमें साफ-साफ लिखा है कि दुकान पर चाइनिज माझा मौजूद नहीं है। चांदनी चौक इलाके में पतंग विक्रेता राम किशन ने बताया कि चाइनिज मांझा इस बार हमने बेचना बंद कर दिया है। केवल सूती मांझा बेच रहे हैं। वहीं मोहम्मद शबीर ने बताया कि मांझा बंद होने के बावजूद बच्चे तेज धार वाला मांझा ही खोजते हैं। लेकिन हम उन्हें नहीं बेचते।पंतंगबाजों के लिए किसी बड़े पर्व से कम नहींएक तरफ जहां समूचा देश तिरंगे को आजादी से जोड़ता है तो वहीं दूसरी तरफ पुराने पतंगबाजों के लिए नीले आसमान में रंग-बिरंगे पतंगे उड़ाना किसी आजादी से कम नहीं है। दिल्ली के प्रसिद्ध पतंगबाजों में से एक जमालुद्दीन बताते हैं कि संवतंत्रता दिवस के अवसर पर पतंग उड़ाना आजादी और देशभक्ति का प्रतीक है। इसके अलावा दूसरे पतंगबाज मनीष गुप्ता और सुनील गुप्ता दोनों भाइयों ने पतंगबाजी से जुड़े विवाद के बारे में बात करते हुए कहा कि पतंगबाजी धारदार चाइनिज मांझे की लड़ाई नहीं है। बल्कि इससे भी कहीं ज्यादा है। पतंगबाजी एक खेल है इसमें अप्रत्याशित और उत्सुकता भरपूर है बिल्कुल क्रिकेट जैसे।प्रस्तुति : प्रशांत राय

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  • Web Title:manjha
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