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प्रकाश इंड्रस्ट्री के प्रबंध निदेशक को एक वर्ष की जेल

चेक बाउंस के एक 20 वर्ष पुराने मामले में अदालत ने प्रकाश इंड्रस्ट्री लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (मालिक) को एक वर्ष जेल की सजा सुनाई है। साथ ही, अदालत दोषी वीपी अग्रवाल को आदेश दिया है कि वह सहारा समूह की दो कंपनियों को मुआवजे के तौर पर दस-दस करोड़ रुपये का भुगतान करे। इस मामले में प्रकाश इंड्रस्ट्री के निदेशक पर आरोप था कि उन्होंने मई 1996 में सहारा इंडिया एयरलाइंस लिमिटेड एवं सहारा इंडिया फाइनेंस कॉरपोरेशन से पांच-पांच करोड़ रुपये का ऋण लिया था। इस ऋण के भुगतान के एवज में प्रकाश इंड्रस्ट्री की तरफ से फरवरी 1997 में सहारा की कंपनियों को दो चेक दिए गए थे, जो कंपनी के बैंक खाते में पर्याप्त रकम न होने के चलते बाउंस हो गए थे। इसके बाद इन कंपनियों ने अग्रवाल को कानूनी नोटिस भेजा। परन्तु प्रकाश इंड्रस्ट्री के मालिक अग्रवाल ने इन नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। जिसके बाद चेक बाउंस के दो अलग-अलग मुकदमे वर्ष 1997 में अदालत में दायर किए गए थे। मेट्रोपोलिटन मजिस्टे्रट नुपुर गुप्ता की अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कि 20 वर्ष पहले ली गई रकम को यदि बैंक में डाला गया तो वह अब तक दोगुनी हो चुकी होती। लिहाजा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जुर्माना रकम को दोगुना किया गया है। अदालत ने यह भी माना कि यह मामला वर्ष 1997 से अदालत में लंबित है, ऐसे में वादी का विचलित होना लाजिमी है।

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