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प्रदूषण रोकने के लिए फसल के पराली से बने खाद

पड़ोसी राज्यों के किसानों द्वारा फसल का अवशेष (पराली व भूसी) जलाने से हर वर्ष राजधानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। हाईकोर्ट में शुक्रवार को याचिका दायर कर प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पराली व भूसी से खाद (कंपोस्ट) बनाने का आदेश देने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार से यह बताने के लिए कहा है कि पराली जलाने पर रोक के बारे में पारित पिछले आदेशों का पालन किया जा रहा है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्तूबर को होगी।

जस्टिस एस. आर. भट और सुनील गौड़ की पीठ के समक्ष दाखिल अर्जी में कहा गया कि पराली से खाद बनाने से दोहरा लाभ होगा। अधिवक्ता हरज्ञान गहलोत ने पीठ को बताया कि खाद बनाने से एक ओर बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगेगा, दूसरी ओर किसान इसका इस्तेमाल कर बेहतर पैदावार पा सकेंगे। उन्होंने हाईकोर्ट से मांग की है कि पराली से खाद बनाने की प्रक्रिया को मनरेगा से जोड़ दिया जाए। अधिवक्ता ने कहा कि मनरेगा पंचायत स्तर की सरकारी योजना है। योजना के मद में सरकार के पास पर्याप्त पैसा और मजदूर भी उपलब्ध हैं। पराली से बनने वाले खाद की बिक्री भी ग्रामीण स्तर पर ही आसनी से हो जाएगी। अधिवक्ता ने अर्जी में यह भी कहा है कि राजधानी में पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से ही प्रदूषण होता है, इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। दिल्ली में हर वर्ष 30 फीसदी पेट्रोल और डीजल अधिक जल रहा है। प्रदूषण बढ़ाने में यह भी बड़ा कारण है। इसके अलावा भवनों के निर्माणा में तय मानकों को पूरा नहीं किया जाना भी प्रमुख कारण है।

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  • Web Title:high court
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