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केंद्र ने भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने से किया इनकार

भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और भिखारियों के पुनर्वास के मसले पर केंद्र सरकार ने यू-र्टन ले लिया है। सरकार ने गुरुवार को हाईकोर्ट को बताया कि भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर नहीं किया जाएगा। इससे पहले सरकार ने कहा था कि भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और भिखारियों के पुनर्वास के लिए कानून में संशोधन किया जाएगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरि. शंकर की पीठ ने केंद्र सरकार के इस बदले रूख को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। पीठ के समक्ष सरकार की ओर से अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने यह जानकारी देते हुए कहा कि अब कानून में संशोधन नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय मंत्रालय ने भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और भिखारियों तथा बेघर लोगों के पुनर्वास के लिए प्रस्तावित विधेयक को वापस ले लिया है। इस पर पीठ ने कहा कि सरकार को अपने निर्णय में बदलाव से पहले प्रारूप विधेयक पेश करने में एक वर्ष लगा। हाईकोर्ट ने सरकार से कहा कि आपको इस प्रारूप विधेयक को पेश करने के लिए एक वर्ष का समय लग गया, यह बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। पीठ ने कहा कि हम केवल दिल्ली के लिए चिंतित थे। सरकार की ओर से अधिवक्ता अरोड़ा ने कहा ‘हम इसे (भीख मांगने) को अपराध की श्रेणी से बाहर नहीं कर रहे हैं, इस प्रस्ताव को अब वापस ले लिया गया है। अरोड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार का भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के लिए कोई अधिनियम नहीं ला रही है। उन्होंने कहा कि इस बारे में राज्य सरकार खुद सक्षम है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि 14 नवम्बर तय की है। हाईकोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर व अन्य की याचिका पर सुनवाई हो रही है। याचिका में कानून में संशोधन कर भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की मांग की गई है। फिलहाल राजधानी में भीख मांग के आरोप में दोषी पाए जाने पर 10 साल कैद तक का सजा का प्रावधान है।

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  • Web Title:high court
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