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उपराष्ट्रपति चुनाव: इन 5 कारणों से RSS और BJP की पसंद बने वेंकैया नायडू

M. Venkaiah Naidu

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को अपने राष्ट्रपति चुनाव के समापन के कुछ देर बाद ही उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वेंकैया नायडू के नाम की घोषणा की। उन्होंने कहा, 'भाजपा संसदीय दल की बैठक और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दलों से विचार-विमर्श के बाद हमने वेंकैया नायडू जी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार चुना है।'

गौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह कुछ दिन पहले ही उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर चर्चा के लिए आरएसएस के दो वरिष्ठ नेताओं से मिले थे। उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में एम वेंकैया नायडू को एनडीए की तरफ से उपराष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाए जाने का फैसला किया गया। पढ़िए आखिर क्यों वेंकैया नायडू के नाम पर भाजपा और आरएसस दोनों ने अपनी सहमति दी...

1. वेंकैया नायडू आंध्रप्रदेश से आते हैं। एनडीए राष्ट्रपति पद के लिए पहले ही उत्तर भारत से रामनाथ कोविंद को खड़ा कर चुकी है और उनके राष्ट्रपति बनने की प्रबल संभावना है।भाजपा पूरे देश में अपने विस्तार की कोशिश में लगी है। वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति पद का दावेदार बनाए जाने से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पार्टी की पैठ बढ़ेगी। 

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2. वेंकैया नायडू चार बार राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं। वह वर्तमान में राज्यसभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके पास राज्यसभा का गहन अनुभव है। वह संसदीय कार्य मंत्री भी हैं और उनके पास संसद के कायदे-कानून की पूरी जानकारी है। अन्य पार्टी के नेताओं से अच्छे रिश्ते हैं, ऐसे में राज्यसभा के संचालन में उनका यह अनुभव काफी काम आएगा। 

3. वेंकैया नायडू बचपन से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं। संघ और बीजेपी दोनों किसी ऐसे नेता को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाना चाहते थे, जिसको संघ और बीजेपी की विचारधारा की समझ हो। ऐसे में वेंकैया नायडू से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था।

वेंकैया नायडू:छात्र नेता से NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार तक का सफर

4. वेंकैया नायडू वर्तमान भाजपा सरकार में सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में से एक हैं। वह सरकार के लिए संकटमोचन की भूमिका निभाते हैं। वेंकैया अटल सरकार के दौरान ग्रामीण विकास मंत्री थे, वहीं मोदी सरकार के दौरान उन्होंने शहरी विकास मंत्रालय की बागडोर संभाली। इसके अलावा नायडू ने संसदीय कार्यमंत्री, सूचना प्रसारण मंत्री का कार्यभार भी संभाला।

5. गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने पिछले सप्ताह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र गोपालकृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपनी ओर से प्रत्याशी घोषित किया था। भूतपूर्व आईएएस अधिकारी रहे गोपालकृष्ण गांधी कई देशों में राजदूत और उच्चायुक्कत रहने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रह चुके हैं। ऐसे में एनडीए की तरफ से उन्हें चुनौती देने के लिए किसी कद्दावर चेहरे की जरूरत थी।


 

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  • Web Title:These are the reasons which made M Venkaiah Naidu perfect Vice presidential choice for BJP and RSS
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