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साइबर हमलों की वजह बिटक्वाइन तो नहीं

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दुनिया भर में पिछले कुछ सालों के दौरान साइबर हमलों में वृद्धि हुई है। इसकी एक बड़ी वजह आभासी मुद्रा बिटक्वाइन को माना जा रहा है। इसका इस्तेमाल कालाधन, हवाला और आतंकी गतिविधियों में ज्यादा हो रहा है। भारत समेत ज्यादातर देशों में इसे कानूनी वैधता नहीं दी है। संभवत: यही एक बड़ी वजह है कि रैनसमवेयर जैसे साइबर हमलों की चपेट में भारत जैसे देश कम आ रहे हैं और जहां इसे वैधता मिली हुई है, वहां ज्यादा हमले हो रहे हैं।  

हमले बढ़े
वर्ष 2016 में पूरी दुनिया में रोजाना रैनसमवेयर के 4000 से भी अधिक हमले हुए। वहीं 2015 में रैनसमवेयर के करीब 1000 मामले सामने आए। साइबर अपराधों से पिछले साल कारोबारी जगत को 30 खरब डॉलर का नुकसान झेलना पड़ा। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा 210 खरब डॉलर तक पहुंच सकता है। 

ये निशाने पर
साइबर हमलों के निशाने पर सभी तरह के उद्योग और छोटी-बड़ी कंपनियां आती हैं। वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल, वित्तीय सेवाएं और खुदरा कारोबार साइबर हमलों के सर्वाधिक शिकार होते रहे हैं। भारत के मामले में साइबर हमलों का असर विभिन्न तरह के उद्योगों पर देखा गया है, भले ही वह उपभोक्ताओं से सीधे संपर्क रखने वाला हो या न हो। वित्तीय सेवाएं, औषधि, तेल एवं गैस के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र साइबर हमलों के प्रमुख निशाना रहे हैं। 

भारत ने समिति बनाई
बिटक्वाइन जैसी आभासी मुद्रा के मामले पर भारत सरकार विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श कर रही है। सरकार ने पिछले साइबर हमले के बाद एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस समिति के सामने मंगलवार को प्रस्तुतीकरण भी दिया। समिति को बिटक्वाइन को प्रतिबंधित, नियंत्रित या स्वनियमित करने पर राय देने को कहा था। कंपनी मामलों का मंत्रालय उन कंपनियों पर कड़ी नजर रखे हुए है जो लेनदेन में बिटक्वाइन जैसी आभासी मुद्रा का इस्तेमाल करती हैं। गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) के क्षेत्रीय निदेशकों के अलावा कंपनी रजिस्ट्रार को ऐसी मुद्राओं के लेनदेन करने वाली कंपनियों से जानकारी हासिल करने का निर्देश मई में दिया गया था।

सावधान:यूरोप, अमेरिका समेत पूरी दुनिया पर साइबर अटैक, भारत भी चपेट में

क्या है बिटक्वाइन
बिटकॉइन वर्चुअल करेंसी है। जैसे रुपये, डॉलर और यूरो खरीदे जाते हैं, वैसे ही इसकी भी खरीद होती है। ऑनलाइन पेमेंट के अलावा इसे परंपरागत करेंसी में भी बदला जाता है। बिटक्वाइन की खरीद-बिक्री के लिए एक्सचेंज भी हैं। कंप्यूटर नेटवर्क के जरिए इस करेंसी से बिना किसी मध्यस्थ के लेनदेन किया जा सकता है। इसे डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है। 

कितना मूल्य है
- भारत में एक बिटक्वाइन 1,09,078 रुपये का है।
- अमेरिका में इसकी कीमत 1710 डॉलर है।
- ब्रिटेन में एक बिटक्वाइन 1337 पाउंड का है।

भारत भी खतरे से बाहर नहीं
इस साल अब तक हुए दो बड़े साइबर हमले का भारत पर कोई खास असर नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और यूरोपीय देशों की तुलना में भारत की साइबर सुरक्षा की स्थिति अच्छी नहीं है। ऐसे में यहां किसी भी समय ऐसा हमला हो सकता है। पाकिस्तानी और चीनी हैकर अकसर भारतीय संस्थानों की साइटों को हैक करने की कोशिश करते रहते हैं। 

विशेषज्ञों का कहना है कि रैनसमवेयर जैसा कोई साइबर हमला भारत में हुआ तो बचाव करना बेहद मुश्किल होगा। इसकी वजह यह है कि यहां ज्यादातर सर्वर सुरक्षित नहीं हैं। संतोष की बात यह है कि ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय देशों की तरह भारत में अभी पूरी व्यवस्था कंप्यूटरीकृत नहीं है। 

कैसे बचाव करें
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि कंप्यूटर के सिक्योरिटी सिस्टम को हमेशा अपडेट करते हुए फायरवाल और बढ़िया एंटी वायरस साफ्टवेयर का इस्तेमाल जरूरी है। तमाम संगठनों या आम लोगों को एहतियात के तौर पर जरूरी फाइलों को एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव में कापी कर लेना चाहिए। इसके अलावा अनजान मेल या पोर्न साइटों से भी सावधानी बरतने चाहिए। 

साइबर बीमा
साइबर बीमा में निवेश अभी बहुत कम है। वैश्विक स्तर पर साइबर बीमा बाजार करीब 4 अरब डॉलर का है और इसके वर्ष 2025 तक बढ़कर 20 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान है। वहीं भारत में साइबर बीमा का बाजार 30 करोड़ रुपये ही है और वर्ष 2020 तक इसके 75 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। 

बड़े साइबर हमले
- याहू (2013): ये अब तक का सबसे बड़ा डाटा चोरी का मामला था। इस साइबर हमले में करीब एक अरब अकाउंट से डाटा चोरी किया गया। 
- ईबे (2014): 14.50 करोड़ यूजर्स को पासवर्ड बदलने को कहा गया था। साइबर हमले में हैकर्स ने उपभोक्ताओं का पासवर्ड, नाम और जन्मतिथि जैसा डाटा चोरी कर लिया था। 
- सोनी (2014): सोनी पिक्चर एंटरटेनमेंट पर हुए साइबर हमले में 47 हजार कर्मचारियों और कलाकारों की निजी जानकारी लीक हो गई थी। 
- यूएस सेंट्रल कमांड (2015): हैकर्स ने दावा किया कि सेंट्रल कमांड के यूट्यूब और ट्विटर के लिंक उन्होंने हैक कर लिए हैं। दावे को सच साबित करने के लिए कमांड का लोगो चेंज कर उसकी जगह एक नकाबपोश का चेहरा लगा दिया गया था। 
- एश्ले मेडिसन (2015): एडल्ट डेटिंग वेबसाइट को हैक करने के बाद हैकर्स ने इसके 3.7 करोड़ उपभोक्ताओं के नाम जाहिर करने की धमकी दी थी। 
- टॉक-टॉक (2015): करीब 1.57 लाख उपभोक्ताओं की निजी जानकारी हैकर्स ने हासिल कर ली। 15,656 अकाउंट्स नंबर, सॉर्ट कोड और क्रेडिट कार्ड जानकारी चोरी कर ली। 
- माय स्पेस (2016): माना जाता है कि 36 करोड़ पासवर्ड और ई-मेल कुछ साल पहले चोरी कर लिए गए। इन्हें छिपे हुए इंटरनेट मार्केटप्लेस में प्लेस किया गया।

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