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गुदड़ी के गांवों में सड़क का अस्तित्व नहीं, विकास से दूर गांवों में उपज रहा है उग्रवाद

गुदड़ी के गांवों में सड़क का अस्तित्व नहीं, विकास से दूर गांवों में उपज रहा है उग्रवाद

झारखंड में रघुवर सरकार के 1000 पूरे हो गए। गांवों का विकास करने की जिम्मेवारी खूंटी विधानसभा के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा के पास है। बावजूद इसके खूंटी जिले के मुरहू, तोरपा, रनिया में सड़कों की हालत काफी खराब है। पड़ोसी जिला पश्चिमी सिंहभूम के गुदड़ी प्रखंड के गांवों में तो सड़क है ही नहीं। इन इलाकों के गांव-टोलों में रहने वाले लोग आजादी के 71वें साल में सड़क की समस्या को अपनी नियति मान चुके हैं। इन तमाम इलाकों में मोबाइल नेटवर्क नहीं है। लोगों के लिए अस्पताल और बाजार पहुंचना जंग जीतने जैसा होता है। विद्यार्थियों का जीवन काफी कष्टमय है। अधिकतर बच्चे स्कूलों के चौखट तक नहीं पहुंच पाते हैं। ये समस्याएं बीज बनकर पूरे इलाके में नक्सलवाद और उग्रवाद को जन्म दे रहे हैं।
तोरपा-कमड़ा मोड़-मुरहू पथ
चार साल पहले तोरपा-कमड़ा मोड़-मुरहू पथ का काम शुरू किया गया था। आज तक निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हुआ। वर्तमान में कई जगहों पर गड्ढे सड़कों पर मेटल पड़े हैं। कहीं अधूरा प्रिमिक्सिंग तो कहीं बनी हुई सड़क टूट रही है।
तपकरा-रनिया भाया जयपुर
इस पथ की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि लोग इसपर चलना पसंद नहीं करते। इसी कारण तपकरा से जापुद होते हुए खेतों की पगडंडी से होकर बाइक सवार कारो नदी तक जाते हैं। उससे आगे जयपुर और रनिया तक सड़क बदहाल है। बड़े-बड़े गड्ढ़ों और कीचड़ से भरे इस सड़क पर बरसात के दिनों में चलना मुश्किल है।
जयपुर से रनिया बाजार
एक साल पहले ही जयपुर से रनिया तक पक्की सड़क बनाई गई थी, जो अब जगह-जगह टूट गई है। जयपुर से रनिया चौक जाने वाली सड़क के अत्यंत खराब होने के कारण लोग जयपुर-रनिया बाजार वाली सड़क से ही आवाजाही करते हैं।
रनिया बाजार-टालडा-पिडुल-जयपुर टोंगरी
इस सड़क के बीच में बहने वाली पिडुल नाले पर पुल नहीं है। पुल नहीं रहने के कारण इसी साल बारिश में नाले में पानी का तेज बहाव हुआ था, जिसमें पिडुल के ग्रामप्रधान पियूस पाहन बह गए और उनका कहीं अता-पता नहीं चल पाया।
मरचा-रनिया-सोदे पथ
पहली बार इस सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का काम चल रहा है। हरियाणा की शिवालया कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य की गति काफी धीमी है, जो आम लोगों की परेशानी की मुख्य वजह है। खूंटी-सिमडेगा जिले के सीमान पर कोयल नदी पर पुल बनकर तैयार है, लेकिन एप्रोच रोड नहीं होने के कारण पुल बेकार साबित हो रहा है। सोदे-मिलन-चौक-नाड़ाहातु मोड़ तक सड़क निर्माण कार्य चल रहा है।
कोनबीरकेल से बघिया-रनिया
कच्चे पथ की हालत चारपहिया वाहनों के चलने लायक भी नहीं है। उधर रनिया से बांदू बड़ाटोली रोड का निर्माण अब तक नहीं हुआ है। गुदड़ी प्रखंड बघिया से पश्चिमी सिंहभूम के गुदड़ी प्रखंड के बांदू, बड़ा बांदू, कंटड़ाबांदू समेत अन्य गांव टोलों तक आने जाने की सड़क नहीं है। पगडंडियों से होकर बांदू स्कूल तक बाइक मुश्किल से पहुंच पाती है। लेकिन उससे आगे पैदल पहाड़ी उतार-चढ़ाव भरे पगडंडियों, खेतों के मेढ़, नालों से होकर गुजरने के सिवा कोई विकल्प नहीं है।

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  • Web Title:Road does not exist in Gudri villages
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